सोचते हैं क्या मांगे आपसे? चलो तलाक तलाक तलाक मागते है!

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रब से आपकी ख़ुशी मांगते हैं
दुआओं में आपकी हंसी मांगते हैं
सोचते हैं क्या मांगे आपसे?
चलो तलाक तलाक तलाक मागते है!

आज मेरे यार की शादी है..........लगता है जैसे सारे संसार की शादी है..........

शर्किट! यह क्या बक रहा है ? ..तेरी भाभी से अपुन की शादी तो हो गयेला है, तो फिर काई कू और किस वास्ते गारयेला है ? 

मुन्ना भाई! अपुन आपके लिए नही गारयेला है - अबी, ये तो ठहरा फिल्मी गाना ! और, फिलम में तो अतिश्योक्ति का इस्तेमाल होता इच है भाई!
भाई हिन्दुस्थान में बिच-बिच में ऐसा शादी होता है जिसकू देख ऐसा लगता है जैसे पुरे संसार की शादी है. ऐसा ईच एक शादी अभी-अभी हुआ है, लेकिन अख्खा देश में उसका चर्चा होने लगा है . बरात आया भी नही कि बैंड पहले से ईच बजने लग गया था भाई! आतिशबाजी चल रहा है रोज बयानबाजी का बम फुट रहा है. जब भी ऐसा शादी होता है सडक पर वीडियो कैमरा और माइक्रोफोन घुमने लगता है.

अरे सर्किट! तू क्या बक रहिया है, अपुन के भेजे में तेरी कोई बात नही घुसता ईच नही भिडू !

भाई! इस बार दो खिलाड़ी लोग [सानिया+सोयब] का शादी १५ अप्रेल कों होने वाले था पर दो दिन पहलू ईच बेचारों का "मुल्ला-मोल्वियो" ने बैंड बजवा डाला .ये कोई पहला शादी नही होएंगा , जिसमे कोई अडंगा डालने कू एक "फटाकड़ी" {आयशा} पैदा हुई है ? ओर भाई सोयब मिया ने आयशा बेगम कों तीन इजी इन्सटोलमेंट में (पांच-पांच हजार तीन महीना देंगे) तलाक-तलाक-तलाक का गेम बजा डाला !

टेशन लेने का नही देने का - भाई अपुन का ईच फोर्मुले पर सोयब मिया फुदक रिया है.

भाई! जब तुम्हारा शादी मान्यता भाभी के से पक्का होरिया था तभी ईच कोई उलटी खोपड़ी का "मिराज" पैदा हुआ था और भाभी का पहला पति होने का दावा कर रहा था! भाई! उस मिराज के बच्चे को खोपचे में लेकर अपुन ने ऐसा धोया की वापिस दिखा ईच नही ! और दिखता काइकू... मान्यता भाभी ने पहले ईच तीन बार इजी इन्सटोलमेंट में तलाक-तलाक-तलाक बोल उसके हार्ट की तो वाट लगा ....डाली .

भाई, तुमको तो मालुम ईच है जो शादी अख्खा संसार का शादी लगता है , उसमे संसार का रूचि शादी के बाद भी बना रहता है! जैसा की एक हिरोइन का मामला में हुआ! हिरोइन गर्भवती हुआ तो लगा जैसे अख्खा दुनिया गर्भवती हो गया ! हिरोइन को उबकाई आता था तो अख्खा दुनिया कू उबकाई आता था! वो चैक- अप का वास्ते जाता था, तो अख्खा दुनिया चैक- अप का वास्ते जाता था! जच्चा बच्चा का सेहत राष्ट्राय मुदा बन गयेला था भाई! जब तक उसका बच्चा का जन्म नही हुआ वीडियो कैमरा भी ढीला कपड़ा पहने नजर आता था.

अबी हिन्दुस्थान में एक और एइचा ईच शादी हुयेला    है जैसे अक्खा संसार की शादी हुएला है . दुल्हा मिया पाकिस्थान से कलटी मारके बरात के पहले ईच दुल्हन के घर पहुच गयेला था ! सडक पर वीडियो कैमरा और माइक्रोफोन लोग घूम रिया था . किसम-किसम का लोग का राय पुछा जा रहा है! भाई! हिन्दुस्थान में आज तक कोई आदमी नही देखा गया की जो ये बोल देवे की "मेरे कू कुछ नही बोलना है इसमें मेरा कुछ लेना देना नही है!

भाई! अबी, कल सानिया मलीक के रिशेप्सन में सूट बुट में जाने का है...... कैमरा और माइक्रोफोन लोग आने वाला है.

सर्किट! कमाल है ! ये "अल्हा" भी गजब की चीज है किघर किघर शादी करवा देता है हिन्दुस्थान और पाकिस्थान में दोस्ती तो होती नही , पर शादी हो जाता है !" ...एक बात और जो शादी सारा दुनिया का होता है, उसमे लफडा भी दुनिया भर का होता है! ऐ! सर्किट , टेशन लेने का नही देने का..........रे.....



नोट - धर्म रीती रिवाजो क़ी आड़ में महिलाओं के जीवन के साथ हो रही खिलवाड़ के विरोध में यह व्यंग लिखा है.... क्या मुस्लिम महिला महिला नही होती है ? सिर्फ तीन बार तलाक बोल देने मात्र से व्यक्ति सांसारिक कर्तव्यो से विमुख हो जाता है ? ये कैसी प्रथा ? ये कैसा नियम ?

भाई - विनम्रता बोले तो ...?

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मुन्नाभाई ओर सर्किट दोनों ही पिछेले दिनों दुनिया भर की पार्लियामेंट के दोरे पर  थे. कई देशो की पार्लियामेंट में जाकर मुन्नाभाई ने जो देखा वो भारतीय ससंद एवं विधान सभाओं में अक्शर देखने को मिलता. है. राजनिक  बहसों में गांघीवादी  विचार धारा  को मिलाने का उनका सपना साकार ना हो सका.
-सर्किट! साला ये नेता तो सभी एक दुसरे की ठुकाई करने में लगे है ? भाई!  बोले तो एक-एक के कान की पिछु राफसिक लगाना मंगता है. सर्किट अपुन शिष्टाचार के दोरे पर है विनम्रता का प्रयोग करने का ! भाई - विनम्रता बोले तो ----- ?????  विनम्रता बोले तो सुट-बुट पहनकर भाई-गिरी करनेका .....
How Different Countries Debate in Parliaments/ Congress




उक्रेन  








तुर्की








ताइवान







साउथ कोरिया






रशिया








मेक्सिको






जापान






इटली





भारत



see what happens during political meetings in people's republic of china...





PEACEFUL,





HARMONIOUS





AND





NO DISTURBANCE.


आप कोन है यह कोई सवाल नहीं है.

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आप कोन है यह कोई सवाल नहीं है।
It does not matter Who you are........


May be you are king of world


May be you are most dangerous in वर्ल्ड

May be you are an independent one...
May be you can rule other or rule the world
May be you are most lovable by others...
Either you are a Gentleman...
or most DANGEROUS killer of the world...
But the fact is this..........












When you are at home........











Wife is wife...



Dose not matter who the Hell are you...

आओ रंग ले हम तन-मन

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आओ रंग ले हम तन-मन,
रंग-रंगीली होली के संग में.
भूल कर भूत की भूलो को,
मिल ले गले आज सभी संग में..
ऐसा जीवंत कोई पर्व नही,
दुनिया जहांन में.
धन्य मानो अपने जीवन को-
कि तुम पैदा हुए हिन्दुस्थान में ..
भूल भाषा, धर्म, जाती,-
क्षेत्र ओर समाज के सवाल को .
टूटे दिलो को जोड़ लो,
उठा लो अबीर ओर गुलाल को.
आओ चले मिलकर फिर,
उसी पुराने रंग ओर ढंग में.
हम एक थे, हम एक है,
आती है आवाज यही होली में.
प्रस्तुति -: प्रेमलता एम्. सेमलानी

बैंगलोर से मेरा पुराना नाता, गार्डन सिटी" कब "पत्थरो की नगरी बन गई!!

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इन्ह दिनों बाहर  रहने का अवसर मेरे लिए कुछ अधिक था! मित्र के घर के मोहरत के सिलसिले में मुझे बैंगलोर जाना पडा . मेरे मित्र, रिश्ते में मेरी बहिन के देवर है . "राजाजी-नगर" में मित्र ने तीन मंजिला बिल्डिग बनाई जो सुन्दर एवं योजनाबद्ध ढंग से बनाई गई है.  बैंगलोर का यह क्षेत्र (राजाजी नगर) सुहाना, सुन्दर एवं साफ़   सुथरा लगा. हां इस क्षेत्र के ब्रिज के निचे ट्राफिक  जाम से मार्केट आने-जाने में बहुत अधिक समय जरुर लग जाता है  !

वैसे बैंगलोर से मेरा पुराना नाता है. गली-गली घूम चुका हु. दस-पन्द्रहा सालो में  बैंगलोर में काफी कुछ बदलाव आया है. विकास भी हुआ है. बहुत बढ़  सा गया है. कई किलोमीटर दूर तक लोगो ने अपना बसेरा बसा लिया है.  कुछ वर्ष  पूर्व बसंतगुडी, जयनगर जो चिकपेट एवं शहर से मात्र ५-६ किलोमीटर दुरी   पर स्थित है लोग दूर बताते थे आज वो ही स्थान बैंगलोर के बीचोबिच में विद्यमान हो गया है. समय कितना तेजी से चला पता ही नहीं चला. "गार्डन सिटी" कब "पत्थरो की नगरी" बन गई, पता ही नहीं चला!.

ट्राफिक समस्या से अभी तक लोगो को निजात नहीं मिल पाई है. जबकि सरकार ने बहुत सारे नए ब्रिज बनाए है. कई रास्तो को "वन वे" कर दिया है. फिर भी ट्राफिक  समस्या "सुर्पनका" की तरह मुह फैलाए खड़ी है.

हां! एयर पोर्ट रोड को काफी आधुनिक बना दिया है. एयरपोर्ट से सिटी आने के लिए मैसूर बैंक तक "ऐ,सी बसों" की अच्छी सुविधा होने की वजह से रिक्शा-टेक्शी वालो की मनमानी पर लगाम जरुर लगा गई है.
रेलवे के हालत भी बुरे ही है - "कंट्रोमेंट से बैगलोर" पहुचने के लिए ट्रेँन को ४५ मिनट लगते है. जबकि मुश्किल से यह रास्ता मिनट का है. वैसे प्लेट -फॉर्म खाली ना होने का बहना  बनाकर रेलवे मंडल क्या साबित करना चाहती है ?  समझ के परे है. कई मायनों में बैंगलोर विश्व स्तरीय माना जा सकता है पर नागरिक सुविधाओं कि कमी के कारण समय की अपव्यता चिंता का कारण है. इनफ़ोसिस , विप्रो , एच सी एल  जैसी  बड़ी कम्पनियों के कारण लाखो जॉबकर्ता देश-विदेश से बैंगलोर में निर्वासित है. इन्ही लोगो  की भारी तादाद ने बैंगलोर में प्रोपर्टी की कीमतों में उछाल लाने में साहयता की है तो सरकारी खजाने को  टेक्स  से लाबाबब कर दिया है. पर रात को ११=३० बजे के बाद उन्हें राहगीरों को खाने पिने को होटले या सड़क पर खुमचे नहीं लगे मिलते है क्यों कि यहाँ का प्रशासन एवं पुलिस इसके लिए तैयार नहीं है. हां फाइव स्टार होटल  रात भर खुला मिलेगा. पर लोग रात को १२ बजे के बाद घरो से निकल कर टहलते नहीं है बैंगलोर में शायद पुलिस्या डर ? हां रात को कभी जोरदार भूख लगा जाए तो घबराए नहीं रेलवे स्टेशन चले जाए वंहा की "केंटिन" में देर रात  तक स्वादिष्ट भोजन मिल जाएगा. "एमजी रोड " पर घूमने एवं शापिंग करने का आनंद कुछ ओर ही है. मुझे तो "सुखसागर" की पाँव भाजी बड़ी ही लजीज लगी. वैसे यह मुंबई "सुखसागर" की ही ब्रांच है.

आज मुंबई पहुचा ! लगे हाथो "रघुलिला शापिग  मोंल" में पत्नी के साथ "माई नेम इज खान" देखने बैठ गया ! पिच्चर से एक सन्देश जरुर मिलता है -
" दुनिया में दो ही तरह के इन्शान होते है - एक अच्छा इसान, दूसरा बुरा इंसान."
हिन्दू, मुश्लिम, जैन, सिख, इसाई यह सभी तो इंसानों कि इंसानों के लिए बनाई हुई खाई ! कुल मिलाकर फिल्म एक सामाजिक सन्देश देने में सक्षम हुई. शाहरुख खान को एवं काजोल को बधाई. वैसे करण जोहर भी इसके हकदार है.
बालासाहेब का आभार की वो "माई नेम खान" पर प्रतिबन्ध नहीं लगाते तो मै इतना उत्सुक नहीं होता यह पिक्चर देखने के लिए नही जाता .
कल  मेरे ब्लोगर मित्र विवेक रहस्तोगीजी की शादी की सालगिरह थी. फोन  मिलाया शुभाकामानो के लिए तो वो मद्रास में थे. काफी लम्बी बात चली.   मैंने उन्हें एवं भाभीजी को शुभ-कामनाए प्रेषित की.
वन्दना गुप्ताजी की १५ फरवरी को शादी की सालगिरह थी. वंदनाजी की कविताओं का मै बड़ा फैन हु एक बार चैट पर बात हुई थी.   वंदनाजी को हार्दिक शुभ कामनाए ....
वैसे अरविन्द जी मिश्रा की भी कल १८ फरवरी को  शादी की   सालगिरह मनाई गई उन्हें भी मै प्रणाम करते हुए मंगल कामनाए प्रेषित करता हु.
कल सुबह मै फिर कही नई  यात्रा पर निकल चुका होउगा जब आप यह पोस्ट पड़ेगे. नमस्ते....

वेलेंटाइन डे हिंदी में बोले तो प्रेमियों का दिन

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किसी कारण वश यह पोस्ट मै कल १४ फरवरी को प्रसारित नही कर पाया। कारण कि मै उन्ह दिनो बैन्गलोर मै हू। यह पोस्ट आज प्रसारित कर रहा हू। क्ष मा करे।


प्रेम एक ऐसी संपदा है जिसे कोई चुरा नही सकता! कोई छिन नही सकता! जब भय पूरा छुट जाता तब प्रेम का उदय होता है. मगर तुम्हारा प्रेम नही छीना जा सकता. जीवन जीने के लिए तीन शब्दों का मूल मन्त्र है - "लिव-लव-लाफ "
-जियो,प्रेम करो और हंसो. जो व्यक्ति परम का आलिगन कर लेता है, उसके जीवन में हंसी के फुल खिलते है.आओ आज हम सभी जीवन का प्रेम से आलिगन करे.

१४ फरवरी यानी "वेलेंटाइन डे" हिंदी में बोले तो प्रेमियों का दिन.प्रेम सूफियो का मार्ग है.सूफी, परमात्मा को "प्रेयसी" के रूप देखता है.
परमात्मा एक प्रेमिका है. और भक्त उसका प्रेमी है. पुरुष का चित्त ज्ञान के आसपास घूमता है. स्त्री का समग्र भाव प्रेम के आसपास घूमता है. पुरुष अगर प्रेम भी करता है, तो उसका एक अंश ही प्रेमी बन पाता है. स्त्री जब भी प्रेम करती है,तो उसका समग्र ह्रदय प्रेम बन जाता है.

प्रेम हो जाना निःसंदेह एक सुखद अनुभूति है। लेकिन वो सिर्फ दैहिक आकर्षण नहीं बल्कि एक दूसरे के सुख-दुःख का साझा निर्वहन है। प्रेम की परिणिति जब विवाह की वेदी तक जाती है तो दोनों की जिम्मेदारी है इसे सफल बनाना।

बुद्धिमानो को प्रेमी पागल जैसा मालुम पड़ता है.और है भी! प्रेम बुद्धि से नही "ह्रदय" से किया जाता है. और ह्रदय के पास कोई तर्क तो है ही नहीं, सिर्फ भाव है और भाव अंधा है. प्रेम की इन्ही कमियों की वजह से अहंकार पिघलता है. प्रेम की आग में अंहकार पूरी तरह जल कर ख़ाक हो जाता है. प्रेमी अपने आपको मिटाकर दुसरे को बचा लेता है. जिस दिन एक बच जाता है, उसी दिन सत्य उपलब्ध हो जाता है.

कुछ अप्रेमी (पर्दे के बाहर) , "वेलेंटाइन डे" को असभ्यता का घोतक एवं भारतीय संस्कृति के लिए विनाशकारी मानते है. किन्तु में उनके तर्को से सहमत नही हु. मेरा मानना है की प्रेंम दया नही कर सकता. क्रोध भले ही करे. दया तो तभी होती है, जब प्रेम "तिरोहित" हो जाता है. दया तो राख है. जब प्रेम जल चुका होता है, तब राख बचती है. जिसे तुम्ह प्रेम करते हो, उसे कुरूप अवस्था में भी प्रेंम कर पाओगे,तभी जीवन सफल है प्रेम सफल है.

इससे सर्जनात्मक शक्ति दुनिया में कोई नही है.प्रेम अम्रत है. जिसका ह्रदय प्रेम में बचा है,उसे प्रेम देना अच्छा लगता है. हमारे जीवन में यह ख़ुशी और आनंद की घटना जैसा बन जाती है. प्रेम सदा बिना शर्त का होता है. जंहा शर्त है,वहा सोदा है. प्रेम जितना गहरा जाता है, इस जगत में कोई और चीज इतनी गहरी नही जा सकती कोई व्यक्ति आपकी छाती में छुरा भोंके वंह इतना गहरा नही जाएगा जितना उसका प्यार- प्रेम आपके भीतर गहरा जाएगा...

सुश्री प्रेमलता एम्.सेमलानी को जन्म दिन के दिन "हेपी बर्थ डे" आज का दिन (१४ फरवरी) मेरे लिए आप सभी से कुछ ज्यादा ही "प्रेममय" है. आज
"वेलेंटाइन डे" यानी "प्रेम का दिन" और आज ही के दिन मेरी जीवन संगनी,साथी- "प्रेम", का "बर्थ डे" भी है. क्यों भाइयो....बहिनों.... है ना डबल आफर मेरे लिए ? तो आज के दिन इस डबल ख़ुशी के शुभअवसर पर मै मेरी जीवन साथी सुश्री प्रेमलता एम्.सेमलानी को जन्म दिन के दिन "हेपी बर्थ डे" बोलते हुए उन्हें जन्म दिन की मंगल कामानाए प्रेषित कर रहा हु. और "वेलेंटाइन डे के अवसर पर अपने प्रेंम का एक बार फिर से गुलाब के फुल से इजहार करता हु.

आपको याद होगा ... प्रेमलता एम् सेमलानी ने "ताऊ डोट इन" की साप्ताहिक पत्रिका में "नारी-लोक" कोलम के माध्यम से खाना खजाना की बाते लिखा करती थी.
आप सभी को भी "हेपी वेलेंटाइन डे"

मूल्य-परम्परा-संस्कार-प्रतिष्टा-कुल परम्परा

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मैंने इंशानी जीवन के कई पहलुओ को एक ही घटना मे तोलने का प्रयास किया. करीब से एक बाप बेटे के कई उलझनों को मैने समाज परिवार ओर व्यक्ति के वैज्ञानिक तथ्यों के करीब महसूस किया. शायद जीवन का यह फलसफा हमारे समझ में आ जाए तो आपसी कलह मनमुटाव परिवारिक चिंताए दूर हो सकती है.


किसी के चेतन मन तथा अवचेतन मन में भयंकर संघर्ष छिड़ा हुआ था. चेतन मन उसे लडकी की ओर खींच रहा था तथा अवचेतन मन अपनी कुल परम्परा की ओर .उसकी मनो दशा इतनी मोहग्रस्त हो गई थी कि उसे ना तो दूकान पर शान्ति मिलती न ही घर पर.

मूल्य-: मूल्य तो हमेशा ही सापेक्ष होते है. एक समय में जिस चीज का जो मूल्य होता है ,दुसरे समय में उसका इतना मूल्य नही होता है. एक व्यक्ति के लिए जिस चीज का मूल्य होता है दुसरे के लिए नही भी होता है!

परम्परा -: हमक कुलीन परम्परा को वहन कर रहे है. हम एक परिवार की सीमा में भी आबद्ध है. इस द्रष्टि से तुम्हारा निर्णय मुझे ओर मेरा निर्णय तुम्हे प्रभावित करता ही है.

संस्कार-: संस्कारों पर किसी वर्ग विशेष का अधिकार नही हो सकता! एक धनी ओर उच्च कुल में पैदा होने वाले व्यक्ति के संस्कार भी खोटे हो सकते है ओर एक गरीब तथा नीच माने जाने वाले कुल में पैदा होने वाले व्यक्ति के संस्कार भी अच्छे हो सकते है.

प्रतिष्टा -: मै यही सोच रहा हु कि परिवार की प्रतिष्ठा तथा व्यक्ति की प्रतिष्ठा में दुसरे शब्द में समाज की प्रतिष्ठा ओर व्यक्ति की प्रतिष्ठा में कोन ज्यादा मूल्यवान है ?
शायद समाज व्यक्ति की रक्षा करता है व्यक्ति को समाज की सुरक्षा रक्षा करनी चाहिए.दोनों मिलकर ही एक सुव्यवस्था को उजागर करते है.

क्षणिक -: शादी कोई ऐसा क्षणिक देह बंधन नही है जिसे व्यक्ति हडबडी में जोड़ ले .बल्कि यह तो एक ऐसा आत्मीय सम्बन्ध है जिसे बहुत सोच समझकर निर्धारित करना पड़ता है.

समाज सरचना का यह गहरा एवं गुढ़ रहस्य वैज्ञानिक आधार लिए हुए प्रतीत होता है.आजकल लव मैरिज आम बात हो गई है. हरेक समाज में यह प्रचलन चल पड़ा है. ऐसे में युवाजन जाती, धर्म, गोत्र, का पलायन कर अपने सुखी वैवाहिक जीवन क़ी अपेक्षा करते है. कुछ रिश्ते कामीयाबी के शिखर पर चढ़ भी जाते है कुछ रिस्तो में विराम सा आजाता है. घर परिवार एवं समाज के बनाए नियमो को हमारी भलाई एवं रक्षा हेतु बनाए गए थे पर आजकल धडल्ले से युवाजन उक्त नियमो को तोड़ मरोड़ रहे है. कारण बताते है-" हम शिक्षित है, २१वी शदी में रहते है, ओर हम हमारा भला बुरा समझते है." यह तर्क ही सही नही है ! जन्मदाता विवश है सामाजिक परम्पराओं क़ी अहवेलनाओ को देखने के लिए ...युवाजनो द्वारा ऐसी बातो को किसी दकियानूसी विचारों का वास्ता देना यह उनकी भूल साबित होने जैसा है.

अंत में एक पक्ति में अपनी बात खत्म करना चाहता हु
"सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से,
राष्ट्र्य स्वयम सुधरेगा !!"

मुंबई मेरे ताऊ की

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यह सवाल ही बेकार है की मुंबई किसकी है ?  दुनिया में कैलफोर्निया से लेकर कालाहांडी तक ओर मुंबई से लेकर म्यूनिख तक हजारो ऐसी जगह है जिनका एक नाम है. और जंहा इंसानों की छोटी मोती आबादी बसती है.

यह सवाल आपके मन में भी होगा जैसा अब तक सब गलत फहमी के शिकार थे की मुंबई हम सब की किन्तु अफ़सोस हमारी सोच बेकार निकली. ऐसा सवाल हर जगह तो नहीं उठ रहा है.  यह सभी  जानते है की कोनसा गाव या शहर किसका है और किसका उस पर कितना अधिकार है. इसलिए मुद्दा यह है की यह सवाल कोंन उठा रहा है ?  जब यह सवाल एक बच्चे से पूछा गया की मुंबई किसकी तो उसने तपाक से कहा -" मेरे ताऊ की है मुंबई."

मुबई सिर्फ ओर सिर्फ मराठियों की है. यह बात कई मर्तबा दशको पूर्व से राग-अलापा जा रहा है. चव्हाण साहब यहा के मुख्यमत्री थे तब राजस्थानियों को बोम्बे छोड़ राजस्थान जाने की चेतावनी मिली थी. तब  राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मोहनराज सुखाडिया महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, श्रीमती  इंदरा गांघी के बिचबचाव से मामला शांत हुआ. अब ठाकरे  परिवार के सदस्य उसी बात को दोहरा रहे है.  यदि वो ऐसा कह रहे है की मुंबई महाराष्ट्रवालो की है तो मुंबई उन्हें दे देनी चाहिए. यह लेंन  देंन जवाबी ही होना चाहिए. कानूनी तोर पर यह हो नहीं सकता. अगर पिछले चुनाव में उन्हें सीटे ज्यादा मिली होती तो  सरकार भी दे दी जाती.

ओर यूपी-बिहार वासियों के प्रति वो ही  जहर उगला जा रहा है.  ठाकरे परिवार के सदस्य, अमिताभ,सचिन तेंदुलकर, मुकेश अम्बानी, शाहरुख खान पर इसलिए दहाड़ते  है की ये लोग मुबई को भारत का हिस्सा बताते है ओर कहते है की मुंबई आम भारतीयों की है. किसी एक जाती, भाषा रंग, में उसे नहीं बाटा जा सकता है. मुंबई पर ही नहीं पुरे देश के कोने-कोने पर भारत के आम नागरिक का बराबर का हिस्सा है. पर शिव-सेना, मनसे के नेता  मराठियों की हमदर्दी पाने की राजनीति के माध्यम से अपना अपना वोट बैंक तैयार करने में लगे हुए है. लगे हाथो राहुल बाबा भी बहती गंगा में (राजनीतिक कुंड) में हाथ घोने बैठ गए, ओर बिहारियों की हम दर्दी लुटने की फिराक में देश में प्रांतवाद की हवा को फुकने का काम किया है.  यह कैसी राजनीति ? मानवता ओर मानवीय भावनाओं का यह कैसा बलात्कार  ?  यह कैसा प्रातंवाद ?

रतन टाटा के उस कठोर निर्णायक फैसले से सभी प्रवासियों को एक सबक लेना  चाहिए जब शिन्गुर (कोलकत्ता) में नैनो के प्रोजेक्ट को लेकर गन्दी राजनीति शुरू हुई तो रतन टाटा ने करोडो की सम्पति को तिलांजलि देकर वहा से हट गए  तब केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की पेंट गीली हो गई. क्यों ना आत्मसमान से जिया जाए ? क्यों ना रतन टाटा के निर्णय को मुंबई में रहने वाले अप्रवासी सामूहिक रूप से फ़ॉलो करे ? करना चाहिए  तभी नानी याद आएगी ? यह राजनीतिज्ञो के लिए महत्वपूर्ण सवाल है वरना यह  बेकार बहस से ज्यादा कुछ नही है.
जय हिंद जय महाराष्ट्रा

पढ़ना है तो पिटना होगा!!!

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विदेशी वस्तुए , विदेशी कोच , विदेशी डिग्री , यह हमारी गुलाम मानसिकता का परिणाम है. विदेश में पढ़े - लिखे की इज्जत ओर घरेलू सस्थानों में पढ़े लिखे हेय नजर से देखने की प्रवर्ती का नतीजा है आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले .


२०२० में महाशक्ति बनाने का सपना संजोने वाले भारत में ऐसे शिक्षा सस्थानों का निर्माण क्यों नहीं किया जाता जँहा आस्ट्रेलियन एवं अमेरिकन छात्र पढ़ने को गोरव समझे ?


वहा की सरकार भारतीय छात्रों पर  हमलो को नस्लवाद नहीं मानती . भारतीय हुकमरान कठोर रुख अपनाने की बजाय पिलपीली भाषा में विरोध जताकर क्या साबित करना चाहती है ?

हद तो तब हो गई जब २१ वर्षीय नितिन गर्ग के पेट में चाक़ू घोपकर उसकी ह्त्या कर दी गई . ओर तो ओर पटियाला के युवक रणजोध सिंह को जलाकर मार दिया.
अब तक भारतीयों पर हमले के १०० मामले प्रकाश में आए किन्तु दुःख इस बात का है की आस्ट्रेलियन सरकार विफल रही इस नस्लवादी आंतक को रोकने में,वही भारतीय प्रसशान लाचार दिख रहा है, इस पुरे प्रकरण पर.


अब यह भारत की प्रतिष्ठा का,  सम्मान का सवाल है. अपने बच्चो के जीवन का सवाल बन गयाहै. ऐसे में हमे कठोर रुख अपनाना होगा. हमे आस्ट्रेलियन निर्मित वस्तुओ का बहिष्कार करना चाहिए. हमे आस्ट्रेलियन क्रिकेटरो के साथ कोई मैच नहीं खेलना चाहिए एवं उसका विरोध करना चाहिए . समस्त व्यापारिक सम्बन्ध विच्छेद कर देने चाहिए...

एसेंशियल टिचिग्स ऑफ़ हिन्दुइज्म

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मनुस्मृति मे कहा गया कि स्त्री की जीवन भर रक्षा करनी चाहिऍ। इसे, स्त्रियो की स्वतन्त्रता का विरोधि और उन्हे गुलाम मानने की भ्रान्ति पैदा हो गई। है। इस भ्रान्ति का विरोध करते हुऍ अग्रेजी की महिला ग्रन्थाकार केरी ब्राउन ने अपने
"एसेंशियल टिचिग्स ऑफ़ हिन्दुइज्म नामक'" प्रख्यात पुस्तक के पृष्ट १८६ के मनु के श्लोक का वास्तविक अर्थ समझाया है.
"हिन्दू समाज ने स्त्री को हीन या असमर्थ कभी नहीं माना है. उसे हमेशा समाज के सम्मान ओर शक्ति का प्रतिक माना है. जिस प्रकार किसी मूल्यवान मुकुट को रक्षा के बिना नहीं रखा जाता है, वैसे ही स्त्री को सरक्षण के बिना नहीं छोड़ा जा सकता है. यही मनुस्मृति के श्लोक का अर्थ है. स्त्रियों पर परिवार के लिए जीविकोपार्जन का अतिरिक्त भार नहीं डाला जाना चाहिए क्यों की वह समाज की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी का निर्वाह करती है. वह शिशु के जनन ओर  रक्षण , परिवार के योगक्षेम ओर अध्यात्मिक विकास की ओर बच्चो को संस्कारित करने की जिम्मेदारी का निर्वाह करती है. "

भारतीय सस्कृति में नारी को दैवी गुणों से संपन्न माना गया है. और उसे  अतियंत सम्मान का दर्जा दिया गया है . अपनी माँ में परमात्मा का दर्शन (मातृ देवो भव) मानने के साथ अपनी पत्नी के अतिरिक्त अन्य स्त्रियों को माँ जैसा मानने जैसा जीवन मूल्य हमारी भारतीय  सस्कृति की विशेषता है.

पत्नी आजीवन सखी है. तथा वह माँ के संमान ही सम्माननीय है. क्यों की वह उसके बच्चे की माँ है. यह स्त्री को दिया हुआ अत्यंत महत्त्व का स्थान है. हर लड़की /स्त्री  मातृत्व का अवतार है . यह विचार पुरुषो के कामुक प्रवर्ती को सयम में रखता है. यह स्त्री मूल्यों का रक्षा कवच है. जो उसे अत्याचारों से बचाता है.  यह स्त्री को पुरुष की भोग्या मानने वाली पाश्चात्य सभ्यता की प्रवृति का विरोधी है. हमें ऐसी पाश्विक वृति को त्याग कर भारत के शाश्वत ओर दैवी मूल्यों को बचाना है. यह मानव के अत्याधिक पवित्र ओर सनातन मूल्य है.
कुछ घटनाओं को अपवाद समझना ही अपेक्षित है.

इतना प्यार आर्शीर्वाद-हिन्दी ब्लोग जगत में ही सम्भव है.

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मेरा परिचय कोई खास नही है। हिन्दी हिन्दुस्थान को मै प्यार करता हू। मुझे लिखने का शोक है। किताबे पढने कि ललक हमेशा ही बनी रहती है। ज्यादा कुछ लिखना आता नही बस देसी दिमाग मे जो भी चलता है कलम के माध्यम से उडेलने का काम करता हू। कलम की स्याही सूखने का नाम नही लेती। विनोबा भावे के विचारो से प्रभावित हूआ तो समाज के लिऐ कुछ छोटे मोटे कार्य करने का प्रयास करता हू।जब तक लोग पसन्द करेगे मै उनके लिऐ लिखूगा, जब वो उब जाऐगे तब मै मेरे लिऐ लिखूगा।

प्यार को मै मानव कि सबसे बडी अभिव्यक्ती समझता हू जहॉ कभी कही सफल हुआ तो असफल भी रहा। गुस्से को मै जीवन का अभिन्न अंग मानता हू, मेरी सोच है की मर्यादित आक्रोस सफलता का कारण बनती है एवम अनुशासनहीन आक्रोस आदमी के जीवन को समाप्त कर देती है।

कर्म मै मेरा अटुट विश्वास है पर फल कि इच्छा भी रखता हू सयमित भाव से मेरे द्वारा लिखित -
"हे प्रभु यह तेरापंथ", "मुंबई टाइगर" , "ब्लोग चर्चा मुन्नाभाई की", "द फोटू गैलेरी" , "माई ब्लोग", "महाप्रेम" , "सलेक्शन एंड कलेकशना", हिन्दी चिठ्ठो के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करता रहा हू - संजोता रहा हू।
इन्ह सभी चिठ्ठो पर समय समय पर टिप्पणियों द्वारा आपका स्नेह प्यार मिलता रहा है

मुझे लिखना अच्छा लगता है, तो लिखने के बाद आप लोगो की प्रसंसा भरी टिप्पणियों से मै उत्साहित होता हू. शायद यह मानवीय अवतरण की खूबी है या कमी मुझे नही पत्ता, पर यह सच्च है की टिप्पणियों ने ब्लोग लिखने के लिए मुझे प्रेरित भी किया या यु कहू तो कोई अतिशयोक्ति नही की टिप्पणियों ने मेरे लिखनेकी सक्रियता को लालस प्रदान किया।

हिन्दी चिठाकारी ने मुझे अपने आपको अभिव्यक्त करने का सुनहरा मोका प्रदान किया दूसरी और देश -विदेश में कई लोगो से परिचय कराया, नए मित्रो से मिलवाया एवं एक अटूट विशवास भरा सम्बन्ध बनवाने में हिन्दी ब्लोग जगत मेरा हमसफ़र बना।

कुछ अंतराल पूर्व कभी सोच भी नही पाता था की मै महावीर, हिन्दी भाषी व्यक्ति, अपनी बात अपने लहजे में , अपनी भाषा में , कलेजे से बहार निकाल सकूंगा। किंतु ब्लॉग ने यह सभी मुमकिन कर दिया। मेरे लिए ब्लॉग ने कई नए एवं अनूठे रास्तो को खोल दिया यह ब्लोगेर की दुनिया सपनों से कम नही थी मेरे लिए . बिना कोई खर्च किए अपने ढंग से साफ़ सुंदर अक्षरो की लिखावट बिना कोई सलवट सचित्र , कलरफुल अपने आप को संजोने का एवम व्यक्त करने का सहज सरल शुलभ अवसर हमे देती है। मुझे गर्व है की मै भी ब्लॉग संसार का हिस्सा हू.

आप सोच रहे होगे इतनी सारी अच्छाइयो के बाद बुराई कंहा है ?

बुराई ब्लोग संस्करण में या उसके फोर्मेट में कदापि नही है बुराई है कुछ लोगो की मानसिकता में उनकी सोच में
जो उभर कर यदाकदा बहार आती है और ब्लॉग जगत के वातावरण को दूषित करती रहती है। इसे लोगो की विचार धारा स्वच्छ अभिव्यक्ति की बजाय कुंठित मनोभावना से ओतप्रोत होती है। साफ़ शब्दों में कहू तो जलन -इर्छ्या उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाती है। डाक्टरी भाषा में ऐसे व्यक्तियों को मनोरोगी भी कहा जाता है। इस तरह के मनोरोगी सिर्फ़ ब्लॉग जगत में ही है इसी बात नही है, ऐसे मनोरोगी बहार या घरेलु दुनिया मे भी है. जो खुले में भी सार्वजनिक स्थानों पर अच्छे लोगो की गरिमा को ठेस पहुचाने से नही चुकते है। कई मोको पर घर परिवार के सदस्यों के साथ भी वो ऐसा ही व्यवाहर करते है।

ऐसे लोगो के मन में बच्चपन से ही यह बात दिमाग में घरकर जाती है की वे दूसरो से सुपीरियर है, कोई उनका शानी नही है समय समय पर लोगोका ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए बेतुका बवाल मचाने लग जाते है। जबकि वो लोग कार्य कुशल नही होते है इसलिए अपनेको असुरक्षत पाते हुए अपनी और अटेंशन पानेके लिए ऐसा करते है.

कल मैंने दुखी मन से एक पोस्ट लिखी मेरे असंतुलित मनको आप सभी ने पधारकर मुझे ढाढस बंधाया, मुझे हिम्मत दी की मै लिखता रहू दुःख में सात्वना - सुख में हिस्सेदारी, इतना प्यार आर्शीर्वादयह सभी हमारे हिन्दी ब्लोग जगत में ही सम्भव है। मै आप सभी का तेहदिल से शुक्रिया अदा करता हू की आपने मेरे विचारों को टूटने से बचाया। मै आप सभी को विशवास दिलाता हू की जीवन भर स्वस्थ, सयमित और अनुशासित ब्लोगरी करुगा। जिसमे किसी की भावानाए आहात नही होगी वैसी ही मर्यादित लेखनी का उपयोग करुगा। नमस्कार!