पाकिस्तानी ब्लोगरिया कहे छु छु कर रिया है ?

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बहुत दिनो से सोच रहा था क्या लिखू ? कोई भी विषय हाथ नही लग रहा था। कहने का अर्थ है किसी विषय की पुछ हाथ मे नही आ रही है। चारो तरफ सन्नाटा है। लगता है दुनिया मे खबरे बनना बन्द सी हो गई। देश मे स्वाईन फ्लू के बाद जिन्ना/ जसवन्त फ्लू ने रफतार पकडने की कोशिस की पर साला बिच रास्ते ही दोनो कि टॉय-टॉय फिस हो गई। आडवाणी चुनाव क्या हारे समझो जिवन से सन्यास ही ले लिया। चुनाव के पहले प्रधानमन्त्री को अब तक का सबसे 'वीक' (कमजोर) बताने वाले खुद आडवाणी चुनाव हारने के बाद इतने कमजोर पड गऐ की बेचारे.... आर एस एस प्रमुख को विटामिन्स की डोज देने दिल्ली पहुचना पडा।आज पाकिस्थान के ब्लोगरो को पढ़ने निकल पडा . देखा तो अपने जसवन्तसिह जी  और जिन्ना से वहा के ब्लॉग अटे पडे है. बहुत से हिंदी वेब साइटों के हवाले से जसवंत सिह जी  को  जस्टीफाई करने की भरसक कोशिश की गई.  तो भारतीय ब्लोगर भी अपना मत रखने में पीछे नहीं रहे.

जसवन्तसिह की पुस्तक ने मानो  की बीजेपी को चकते में डाल दिया.  उधर इस विवाद में पाकिस्तानी ब्लोगरो ने बीजेपी द्वारा जसवन्तसिह की बर्खास्त गिरी (दादागिरी) की आलोचना की. एक पाकिस्तानी ब्लोगर ओवेस एहसन {Owais Ehsan, a Pakistani blogger.} ने -" बीजेपी एक असहिष्णु पार्टी है. और कभी सच  को स्वीकार नही करेगी. भले ही यह उसके अच्छे खासे पढे लिखे और प्रसिद्ध पार्टी सदस्यों की और से आए . " पार्टी से जसवन्तसिह के निष्कासन को लेकर भारत के खिलाफ बहुत टिप्पणिया आई है. एक अन्य पाकिस्तानी ब्लोगर सज्जाद आवं {Pakistani blogger, Sajjad Awan} ने कहा ," भारत को दुनिया को अच्छी सदभावना  दिखानी चाहिए की वह अपने लोगो के सूझवो, विचारों , चर्चाओं और सोक का स्वागत कर रहा है. "

एक अन्य ब्लोगर कलसुम {Kalsoom, yet another blogger.}  ने कहा-"हास्यास्पद बात यह है की सिह का वैचारिक सधर्ष बीजेपी के साथ उसी तरह का है, जैसा जिन्ना का काग्रेस पार्टी के साथ था. दोनों पार्टी विचारधारा के सक्रीय प्रस्तावक थे और दोनों ही बोद्धिक असहमति के बाद खुद को अलग कर लिया. अंतर सिर्फ इतना है की सिह ने राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी पार्टी का समर्थन करने से अपना आधार बदलकर बोद्धिक उदारवाद की और कर लिया है. जबकि जिन्ना धर्मनिरपेक्ष थे, उदारवादी नीतियों का त्याग करकठोर  और साम्प्रदायिक नीति को अपनाकर  जनता को अपने पक्ष में किया . कुछ ब्लोगरो ने तो स्वतंत्रता सघर्ष के दोरान कांग्रेस की भूमिका की आलोचना की है. अपने भारतीय ब्लोगर सुभम {Shubham, an Indian blogger.} ने तो कहा -" जब भगत सिह , चन्द्रशेखर ,अश्फाक-उल्ला -खान, राम प्रसाद बिस्मिला देश को एक करने के लिए लड़ रहे थे  टीबी कांग्रेस  और मुस्लिमलीग दोनों समुदाय के बिच  खाई पैदा करने की कोशिस कर रही थी.

भारत में   धर्मनिरपेक्षता  और लोकतंत्र की आलोचना से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करते हुए भारतीय ब्लोगर कपिल राजेश पांडव {Indian blogger, Kapil Rajesh Pandav } ने कहा "बीजेपी ने हमे बदनाम किया है. यह हमे कही का नही छोडेगी. इसके बावजूद हमे कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए बीजेपी की जरूरत है.ताकि लोकतंत्र का अस्तित्व कायम रहे.

जसवन्तसिह को क्रांतिकारी बताते हुए संजीव मिगलानी ने कहा -" सिह को कुछ   आशर्यजनक समाधान मिल गया है  मेरा मानना है कीउन्होंने  न सिर्फ एक पुस्तक लिखी है बल्कि उन्होंने क्रान्ति सुरु कर दी है.

भाई मेरा ऐसा मानना है की यह सभी टाइम खोटी करने का समय नही है .  ना जसवन्तजी ने जिन्ना को देखा ना हमने तुमने  फिर काहे फ़ोख्ट में बजा रहे है ?  घडी दो घडी कुछ अच्छा काम कर ले देश याद करेगा. यह जसवंत सिह जी भी काहे टाइम पास करने जिन्ना पे लिखे, अरे भाई, हमार देस मा कोनोही सब्जेक्ट नाही  बचा का ?  लिखना हो तो लालू है हमार ताऊ है ताऊ का गयन भैसियंन है बावली बुच जितना चाहो लिखो कहे बाउंड्री पार गेंद फैक्त है . का ?  समज़े के नाही ? और यह पाकिस्तानी ब्लोगरिया कहे छु छु कर रिया है ? टोपी सभाल हवा तेज चलत है भाई! पा..... की..... स ...... था....... न........
 
गांधीजी के साथ जिन्ना 
                                                                              


कुछ पाकिस्तानी ब्लोगर कोदेखे 


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Sohaib Qureshi
Wednesday, August 19, 2009
                                     Jinnah: India- Partition- Independence by Jaswant Singh

                                                                         
Owais Ahsan
Owais Ahsan

Education

Sir Syed University of Engineering and Technology
Pakistan Islamia Higher Secondary School

12 comments

Arvind Mishra 9 सितंबर 2009 को 7:20 am

बात तो आपने मार्के की की है !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 9 सितंबर 2009 को 7:52 am

"पाकिस्तानी ब्लोगरिया कहे छु छु कर रिया है ?"
सत्य और तथ्य दोनों को बाखूबी उजागर किया है।
आपको बहुत-बहुत बधाई!

संजय बेंगाणी 9 सितंबर 2009 को 10:31 am

आपने टिप्पणी भेजे की लिंक सफेद कर दी है, खोजने पर भी नहीं दिखती. कृपया रंग ठीक करें.

यहाँ जिसकी आलोचना होगी, उस पार उसे प्रशंसा ही मिलेगी....यह तो ब्लॉगचर्चा हो गई.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 9 सितंबर 2009 को 11:48 am

@संजय बेंगाणी ने कहा…

आपने टिप्पणी भेजे की लिंक सफेद कर दी है, खोजने पर भी नहीं दिखती. कृपया रंग ठीक करें.

sir kar diya............
thanking u

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" 9 सितंबर 2009 को 2:05 pm

भई भारतीय सोच को नकारना तो इन लोगों का धर्म बनता है न...अब वो अपना धर्म निभाए जा रहे हैं!!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ 9 सितंबर 2009 को 3:47 pm

पते की बात कही है आपने।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

'अदा' 9 सितंबर 2009 को 7:11 pm

ए हो बम्बइया बाघ जी,
सही बात कहे हैं जी,
बात इ है जेकरा कोई काम नहीं होता है न उ एही सब करता है....
कहते हैं न बैठल बनिया का करे ......इ कोठरी का धान उ कोठरी और उ कोठरी का धान इ कोठरी...
इ भकचोंधर जस्वन्त्वा को और कुछो नहीं सूझा तो करेगा का बुड़बक.....फोटो तो ऐसा खिचाया है जैसे जिन्ना इनका लंगोटिया यार था...
और पकिस्तनियन का का गलती भाई जब अपना सिक्का खोटा है.....
रहा भा.ज.पा. का बात तो यही होना था ..देह में ताकत नहीं और पहलवानी करेंगे आडवानी तो का होगा ?
भाई जब-जब मल्लिका बहिन का मार्केट डाउन होता है उ अपना कपडा का साइज कम कर देवता और नाम हो जाता, वैसे ही जस्वन्त्वा के तो कुकुर नहीं पूछता कुछ दिन में तो उ भी अपना औकात पर आ गए...
अब तनी दिन तक आह-वाह लेंगे फिर चल जायेंगे गताल-खाता में.....चिंता न करीं हो महाराज....
ऐसन-ऐसन केतना आये और गए हवा खाने .....

कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा

'अदा' 9 सितंबर 2009 को 7:31 pm

पाकिस्तानी ब्लोग्गर सब का वास्ते एक बात और कहते हैं....
चलनी कहले सूप से तोहर में हाजार गो छेद
और इ भी सुनियेगा....
बाप मर गया कादो में डूब के और बेटा का नाम पनडुब्बी !!!!! कैसे हो ????

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 9 सितंबर 2009 को 7:38 pm

अदाजी!

आपकी यह अदा तो पहली बार पढने को मिली।
यह आपकी भाषा को क्या हो गया ?
और आप कब से लेडी ताऊ बन बैठी ?
भकचोंधर जस्वन्त्वा- पकिस्तनियन-
ऐसन-ऐसन केतना आये और गए हवा खाने"
इन शब्दो को पढ ऍसा लगता है मुझे आपके पास टीयूशन मारनी पडेगी। आपकी जय हो मेरी लेडी ताउन!!!!!!

(हो सके तो मेल पता भेजे dada131313@gmail.com )

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 9 सितंबर 2009 को 8:10 pm

अदाजी!

चलनी कहले सूप से तोहर में हाजार गो छेद
बाप मर गया कादो में डूब के और बेटा का नाम पनडुब्बी !!!!!

वहा! वहा!

यह हमारी भारतीय "अदा-मिशाईल" तो "पकिस्तनियन ब्लोग्गर" की एसीन तैसी कर दी।

इसलिऍ कहते है ना भारतीय नारी जब चार दिवारी मे तब तक मॉ- बहिन बेटी, और चार दिवारी से बहार आई तो शक्ती का रुप झासी की रानी।
मै आपको प्रणाम करता हू जी।

प्रवीण शाह 9 सितंबर 2009 को 8:54 pm

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मेरे मुम्बई के बाघ,

जब हम अपने सब देशवासियों से अपेक्षा करते हैं कि उनके लिये 'सबसे पहले देश' होगा तो पाकिस्तानी ब्लॉगर यदि अपने मुल्क का नजरिया रख रहे हैं तो इसमें गलत कुछ भी नही।

अदा जी की यह अदा तो हमने भी पहली बार देखी...

जसवन्त सिंह उन कुछेक राजनेताओं में से हैं जिनकी सत्यनिष्ठा और देशभक्ति किसी भी संदेह से परे है, इतिहास का अध्ययन कर यदि उन्होंने कुछ निष्कर्ष निकाले हैं तो उन से असहमति तो जताई जा सकती है पर मर्यादा के भीतर ही,

'इ भकचोंधर जस्वन्त्वा '
'जस्वन्त्वा के तो कुकुर नहीं पूछता'

कुछ ज्यादा ही नहीं हो गया क्या 'अदा' जी...

अपना विरोध जताना मेरा कर्तव्य था, टिप्पणी छापते हैं या नहीं, हे बाघ, यह तुम्हारा निर्णय होगा, मैं सही हूं या गलत, यह विचार करने का काम ब्लॉग जगत का है।

प्रवीण शाह

'अदा' 10 सितंबर 2009 को 6:29 pm

मेरी टिपण्णी को अमर्यादित कह सकते हैं और शायद मेरी मंशा भी यही थी. इतिहास में तो बहुत कुछ हुआ होगा, एक भी पाकिस्तानी ने गाँधी के पक्ष में कहीं कुछ क्यूँ नहीं लिखा है , गोखले, तिलक, भगत सिंह, राज गुरु क्या इनका कोई ज़िक्र कहीं है पकिस्तान में....फिर जिन्ना का ज़िक्र हिन्दुस्तान में क्यूँ ?
मेरे 'भकचोंधर' शब्द से परेशान होने वाले ये क्यूँ नहीं सोच रहे हैं की जसवंत सिंह ने करोडों हिन्दुस्तानियों की भावनाओं से खेला हैं, अगर इतने ही सत्यनिष्ठ नेता हैं तो देशवासियों को कष्ट क्यूँ दे रहे हैं.....जो हरक्कत उन्होंने की है उसके लिए 'भकचोंधर' मर्यादित शब्द है उन्हें 'देशद्रोही' कहना चाहिए.....इस समय देश को उनके इतिहास के ज्ञान की नहीं एकता के आह्वान की ज़रुरत थी......पकिस्तान में ही हीरो बनना है तो फिर भारत में क्यूँ हैं जाए पाकिस्तान......
हिन्दुस्तान में तो फैशन है ही 'स्यूडो सेकुलर' बनने का...इसमें आश्चर्य भी क्या है ?????