ऐसी माँ ओ को मै कुख्यात कहू तो आपको इतराज है कै ?

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"वक्त से पहले फिसलता बच्च्पन..  अगर गुलाब क़ी अधखिली कली को जबरदस्ती खिलाया जाएगा तो वह फुल बनने से पहले ही अपना  वास्तविक प्राक्रतिक रूप खो देगी. यही हाल आधुनिक माँ बाप क़ी फिंजा में सांस ले रहे उन बच्चो का है जो समय से पहले ही प्रोढ़ बनने क़ी चाह में उनका बच्चपन क़ी मासूमियत को कुर्बान कर रहे है."

 माता पिता "स्टारबॉय"  ओर "सुपर गर्ल" की फोज तैयार करने के प्रयास में बच्चो पर अपनी महत्वाकांक्षाओ को थोप रहे है ओर इसके लिए उनकी जमकर आलोचना होनी ही चाहिए!

मिसाल के तोर पर  "वाक्सवैगन" विज्ञापन को लिजिए जिसमे एक  बच्चा  डराने की हद तक हत्यारा स्वभाव दिखाता है ! "मैक्स न्यूयार्क लाइफ" विज्ञापन में बच्चे के अव्वल आने का श्रेय लेने के लिए माता पिता झगड़ते दिखते है, " रचना" के विज्ञापन में लडकी बैटरी से चलने वाले भालू ओर मिख ममी से जूझती दिखती है .  इसके अलावा बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाली "वेक अप सिड" ओर "३, इडियट्स" जैसी फिल्मो को ले जिसमे माता-पिता की छवि अच्छी नही दिखाई गई है ! वे या तो अपने बच्चो की संवेदनाओ को नजर अंदाज कर रहे है या फिर जान बुझकर दबा रहे है .
इसका सबसे अतिवादी रूप मैंने टेलीविजन के पर्दे पर देखा, जहा किसी रियलटी शो में कोई बच्चा वयस्कों की तरह डांस करने के लिए अपने शरीर को नियंत्रित करता है या फिर किसी धारावाहिक की टी आर प़ी बढाने के लिए ज्यादती की जाती है. कभी परिवार के लिए निर्विवाद आदर्श , परिवार की खातिर सब कुछ त्याग देनी वाली माँ ओर गर्वीले पापा अब पहले की तरह परहितवादी नही रहे , अब वे अपने बच्चो की नजरो में खलनायक बन रहे है. आज उन्हें जिस तरह पेश किया जा रहा जैसे वे अपने बच्चो के दुश्मन हो गए है. ओर अपनी महत्वाकांक्षा ओ को पूरा करने के लिए अपनी संतानों पर जुल्म ढ़ा रहे है!

८ वर्षीय सलोनी देनी को लिजिए, जो कोमेडी शो "छोटे मिया" की सबसे कम उम्र की प्रतियोगी है. सलोनी को शो बिजनेस में उसकी ३७ वर्षीय माँ संयोगिता ने ४ वर्ष की उम्र में अपनी बेटी का पोर्टफोलियो तैयार कराया, ओर एक विज्ञापन फिल्म में काम करवाया था. "देनी परिवार" के लिए कोल्हापुर से मुंबई में जा बसने के लिए इतना प्रलोभन काफी था! आपकी जानकारी के लिए बता देता हु कि यह चाइल्ड स्टार प्रति दिन ३००० से ५००० कमाती है . दुसरे लोकप्रिय बाल कलाकार(बाल  मजदूर ) हर रोज १० से १५ हजार कमा लेते है.
 आजके माँ बाप अपने बच्चो को इस तरह मुकम्मल इंसान का प्रतीक बनाना चाहता है ?
वे चाहते है कि उनका बच्चा रातोरात स्टार बन जाए ओर छोटी सी उम्र में ही नाम के साथ पैसा भी भी कमाए भले ही इससे उनका सामन्य बच्चपन प्रभावित होता हो.
वे उनके भविष्य की खातिर उनके वर्तमान को सिरे से भुलाने में कुछ भी गलत नही मानती है.
 
मसलन, दिल्ली की २७ वर्षीय शिल्पा बुद्धराजा ने रियलटी शो "पति पत्नी ओर वो" के लिए अपने एक वर्षीय बेटे ज्यादित्या को राखी सावंत को सोप दिया. राखी व् इलीश परुजान्वाला को सोप जाने के बाद जयादित्य दो घंटे तक रोता रहा, उनसे पूछेए की क्या आपने कभी अपने बेटे को शो से हटाने के बारे में सोचा था तो चट से जबाब मिला-" नही! मैंने उसे कुछ समय दिया !" वहा माँ तुझे सलाम !!! कैसी व्यापारिन माँ है ?  यह सभी बाते यह दर्शाती है की माँ बाप किस कदर  सवेदनहीन  होकर कच्ची उम्र में ही उनसे भारी अपेक्षाए रखने लगे है!
 ऐसी माँ ओ को मै कुख्यात  कहू तो आपको इतराज है  कै ?     

कई बार रियलटी शो में जजों क़ी आलोचनाओं एवं गेम शो से बाहर होने का  डर इस कदर बच्चो को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है की उनकी अविकसित शारीरिक मानसिक स्थति डावाडोल हो जाती है! अवसादग्रस्त हो जाते है ये बच्चे!  ऐसी घटनाओं से यह प्रमाणित होता है की माँ बाप किस तरह अपने बच्चो के साथ ज्यादती कर रहे है , वे शायद इस बात पर ध्यान नही देते है की उनके बच्चे पर इस तरह क़ी अपेक्षाओं से कितना दबाव पड़ता है .... हम सभी का दायित्व है क़ी हम अपने बच्चो का बचपन चंद रुपयों के टुकडो क़ी लालसा में ना खोने दे ! एवं ऐसी महत्वकांक्षी माताओं को सरे आम टोकना चाहिए !!!

16 comments

Udan Tashtari 11 जून 2010 को 9:13 am

क्या कहा जाये!

महफूज़ अली 11 जून 2010 को 9:16 am

वाकई में........ क्या कहा जाए.....?

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 11 जून 2010 को 9:24 am

बच्चो का मामला है समीरजी ! शायद आप इस पर खुल कर भी टिका कर सकते थे ? या एक स्पष्ट विचार व्यक्त करते तो शायद बच्चो की मदद हो सकती !

महेन्द्र मिश्र 11 जून 2010 को 10:12 am

क्या कहा जाए ? विचारणीय पोस्ट...

ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя 11 जून 2010 को 11:22 am

इस विषय पर बहुत कुछ कहा जा सकता है..हम उन्ही लोगों में से है जो इनका प्रोत्साहन बढ़ाते है और रही बात इनकी कमाई की .तो वो आसमान से नहीं गिर रही है वो भी हम अपनी जेब से दे रहे है...तो गुनाहगार हम खुद है..!!

और हम जो खिलाफत के बोल बोल रहे है उनमे कही कही न कही अंगूर खट्टे है,सच तो ये है की हम भी अपनों को उस रूप में देखना चाहते है और इसकी कोशिश भी जारी रखी हुई है,

हम हर सुबह और हर शाम अपने बच्चों की तुलना इन कुछ ख़ास प्रतिभा वाले बच्चो से करने में लग जाते है...होना भी यही चाहिए यह कला की बात है..
अगर सलोनी में कला है तो आज उसपर इतनी जायदा बात कर रहे है..अन्यथा देश में सलोनियों के ढेर लगे पढ़े है...........
अच्छा लगा इतनी गहरी जानकारी पढ़कर

जय हिन्दुस्तान -जय यंगिस्तान

Shekhar Kumawat 11 जून 2010 को 11:32 am

क्या कहा जाये!

वन्दना 11 जून 2010 को 11:35 am

आपने बिल्कुल सही नाम दिया है………॥ये सब सिर्फ़ अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिये किया जाता है बिना ये सोचे कि इससे बच्चे के भविष्य पर क्या प्रभाव पडेगा?

Shah Nawaz 11 जून 2010 को 12:11 pm

"बचपन" से खिलवाड़ करके नाम और पैसा कमाने की ललक है यह. हम कब सोचेंगे कि यह अंधी दौड़ आखिर हमें कहाँ ले जाकर सोचेगी?

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar 11 जून 2010 को 9:56 pm

आपका कहना बिल्कुल सही है ---इस्के लिये हम सभी को वैचारिक मन्थन करना होगा। इसी विषय पर मैनें एक लेख "टैलेण्ट हण्ट या पाइड पाइपर की बांसुरी" अपने ब्लाग पर भी लिखा था।

सर्प संसार 24 जून 2010 को 5:30 pm

आपकी बातों में दम है।
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क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

शोभा 26 नवंबर 2010 को 6:30 am

आपने उन बच्चो के बारे में तो लिखा जो प्रतियोगिता में भाग लेते है पर एसी माएं तो आज घर घर में है जो दुसरे बच्चो से तुलना कर के अपने बच्चो को प्रताड़ित करती है.

कविता रावत 30 जुलाई 2011 को 1:59 pm

विचारणीय पोस्ट!
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

शिखा कौशिक 30 जुलाई 2011 को 4:55 pm

sach kaha hai aapne aisi maa maa nahi kahla sakti hain .

शिखा कौशिक 30 जुलाई 2011 को 4:56 pm

happy barthday .

जाट देवता (संदीप पवाँर) 4 नवंबर 2011 को 9:32 pm

आपको शक्रिया ऐसी दमदार बाते लिखने के लिये, मैं कहता हूँ मुझे एतराज नहीं है ना, ना,

किरण श्रीवास्तव "मीतू" 6 जनवरी 2012 को 1:51 am

main sobha ji se sahmat hun ..... // आपने उन बच्चो के बारे में तो लिखा जो प्रतियोगिता में भाग लेते है पर एसी माएं तो आज घर घर में है जो दुसरे बच्चो से तुलना कर के अपने बच्चो को प्रताड़ित करती है.\\