रामप्यारी जिद कर रही है.. ताई दस रुपया दो ना, चाउमीन वाली नैनो आई है।

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चुनाव मे नोट कि जगह नैनो बॉटी जाएगी।

नेता नोट के बदले नैनो कि चॉबियॉ बॉटते हुए पकडे जाएगे।
वे गरीब के झोपडे कि बजाय गरीब कि नैनो मे बैठकर फोटू खिचवाएगे। 
समाज , नैनो और गैर नैनो वालो मे बट जाऐगा 
"बिलो पॉवर्टी लाइन" कि तरज पर बिलो नैनो लाइन कहा जाएगा।

व्यग के लिए क्षमा


एक रात को आया सपना, नैनो हुई अपनी-हे प्रभु

हरी निन्द्रा मे थे "हे प्रभु"नैनो का ओपचारिक लॉन्स देखते हुऐ हे "प्रभु", गम्भीरता से सोच  रहे थे कि नैनो के बाद की दुनिया यानी हिन्दुस्थान कैसा होगा? "हे प्रभु के" सपने मे आई कुछ आशन्काए मुलाहिजा फरमाऐ।

(1) हे प्रभू घर से निकल सामने वाली सडक पर पहुचते है,यहॉ वहा देखा। कोई नजर नही आ रहा। अरे...यही तो रहता thaa....कहॉ चला गया? तभी नजर अपने दाई तरफ पेड के नीचे पडती है। एक साथ छह-सात नैनो खडी है। मै गाडी के नजदीक पहुचता हू, उसके अन्दर झॉकता हू। एक शख्स गले मे गमछा डाले, दोनो पॉव सीट पर रख, खैनी लगा रहॉ है। मैने इसे पहले कई बार देखा है पहचानने की कोशिश करता हु। अरे तुम भइया तुम...? जी बाऊजी! मै..। और तुम्हारा रिक्शा....? वो तो मैने बेच दिया ये गाडी कल ही खरीदी है।

(2) ताऊ के घर का दृश्य चल रहा है मेरे सपने मै- ताई ताऊ को कन्जूसी के लिऐ ताने दे रही। ताऊ वर्तमान के खर्चो  और भविष्य की जिम्मेदारीयॉ गिना अपनी कन्जूसी को जस्टिफाई कर रहा है। इस बीच ताऊ के घर के दरवाजे कि कुण्डी बजती है। अरे गन्गूबाई (कामवाली) तुम..आज इतनी जल्दी कैसे? ताई वो क्या है ना...आज मेरा घरवाला (पति) मुझे ड्राप कर गया...वो कल ही गाडी खरीदी है...। इसीलिए मै जल्दी आई। ये सुन कन्जूस ताऊ के मन मे खतरे कि धन्टी बजती है इससे पहले ताई मुझे ड्राप कर दे, मुझे नैनो खरीद लेनी चाहिऐ। ताई भी खुश हो जाऐगी, रामप्यारी को स्कुल छोडने के काम भी आ जाऐगी, साथ ही साथ भाटियाजी कि शैखी भी खत्म हो जाऐगी।
(3)  दिल्ली के एक मार्केट मे चॉइनिज नैनो पचास हजार मै मिल रही है, शैलस भारतवासी बखान कर रहे थे-असली नैनो के मुकाबले इसमे कई दिलचस्प फिचर है। पैट्रोल डालने का झझट नही बैटरी से चलने वाली नैनो। किसी भी मोबाईल चार्जर से चार्ज होने वाली नैनो।
शैलश भारतवासी खरीद लेते है। एक दिन दिल्ली ब्लोगर-मिटस मे शिवकुमारजी, लवलीजी, अरविन्दजी मिश्रा, सजय सैन सागर को बैठा कर इण्डिया गेट के दर्शन कराने ले जा रहे थे तभी दरवाजा टुटने कि आवाज सुनाई पडती है तभी लवलीजी बोलती है अरे यह क्या....? इसमे तो थर्माकॉल का दरवाजा है।



(4) ताई का पल्लू पकड कर  रामप्यारी जिद कर रही है..
ताई दस रुपया दो ना, चाउमीन वाली नैनो आई है।

डक पर नैनो की तादाद बढने लगेगी। जाहिर है हादसे भी बढेगे। जिस तरह ट्र्क से ट्रक भिड जाते है उसी तरह नैनो से नैनो भी भिडेगी। ऐसे मे शास्त्रीजी के "सारथी" पर हेडलाईन आम होगी-  
"नैनो से नैनो लडी.....
दिल तो नही मिले,
दो कि टॉग जरुर टूट गई,
नैनो कि टक्कर मे दो ने नैन गवाऐ।"
सभी ब्लोगरो मे नैनो की होड मची हुई थी। ऐसे मे "हे प्रभु" के  सपने मे आकर श्यामलजी सुमन (मनोरमा) (प्रशासनिक पदाधिकारी टाटा स्टील, जमशेदपुर) ने तो अपने ब्लोगर दोस्तो को जो उनके दिऐ मोबाईल नम्बर पर उनकी कविता सुनेगा उन्हे एक नैनो पार्सल करवाने की स्कीम भी बताई (सुमनजी की टिपणीयो के साथा मोबाईल नम्बर लटका हुआ है आप चाहे तो सुमनजी से


"मोबाईल पर कविता सुनो और नैनो ले जाओ"वाली स्कीम मे भाग ले सकते है।

सडको पर चेतावनी लिखी हुई पढ रहे थे हे प्रभु,-
"सडक पर चलते हुऐ अपने नैनो का इस्तेमाल करे वरना नैनो के नीचे आ जाएगे।"
पुराने कपडो के बदले  बरतन देने वाले भी नैनो रखने लगेगे।
पति कि दो पुरानी पैन्ट के बदले नैनो मिल जाएगी।
घरो मे गेस्ट रुम कि तरह ही गेस्ट नैनो रखेगे।

10 comments

Shastri 13 मई 2009 को 10:24 pm

वाह वाह! मजा आ गया! आप के लिये इस आलेख पर पुरस्कार स्वरूप 1000 नेनो-प्रशंसा ग्रहण करे!!

हां वह अज्ञात सज्जन आते ही होंगे कि इस आलेख में भी आप ने बहुतों को तेल लगाया है.

सस्नेह -- शास्त्री

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` 13 मई 2009 को 10:26 pm

आपने तो नैनो के साथ कई मशहूर ब्लोगरोँ की बातेँ प्रस्तुत कर दीँ - आभार !
- लावण्या

Udan Tashtari 13 मई 2009 को 11:08 pm

हा हा!! नैनों एक..बात अनेक. जाने कितने किस्से कहानी बन गये हैं नैनो पर. :) मस्त लिखा.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 13 मई 2009 को 11:40 pm

Shastriji ने कहा…
वाह वाह! मजा आ गया! आप के लिये इस आलेख पर पुरस्कार स्वरूप 1000 नेनो-प्रशंसा ग्रहण करे!!
हां वह अज्ञात सज्जन आते ही होंगे कि इस आलेख में भी आप ने बहुतों को तेल लगाया है.
सस्नेह -- शास्त्री

aap sabhi humaare aadarniya hai.............
aur aadarniya logo ki seva karne main koi buri baat nahi hai..
yeh baat mere kochiwale guruji ne sikhai ...
ab itni seva ka laabh bhi mila ki aapne 1000 नेनो-प्रशंसा patra mujhe pradhaan kiye..
thank you LAVANYAJI and TASHTARI MAIN UDNEWALE SAMEER LALAJI..

thank you...

अल्पना वर्मा 14 मई 2009 को 1:54 am

waah!
kya khuub vyangy hai --
..aur rampyari ke charchey!bahut khuub--yah rampyari ki mausi bhi hai yahan!badhiya!

Arvind Mishra 14 मई 2009 को 5:16 am

गजब !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 14 मई 2009 को 5:50 am

बहुत खूब भैय्या।
व्यंग्य सटीक है। पढ़ कर मजा आ गया।

ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя 14 मई 2009 को 2:04 pm

हां हां...चलो जी यही बहुत है की आपने मुझे नेनो में बैठने के काबिल समझा...
बहुत ही अच्छा चित्रण किया आपने,खैर यह कोई नयी बात नहीं है यह तो आपकी खासियत बन गयी है की आप हर बार कुछ अच्छा ही लिखते हो
..आप इसी तरह अच्छा लिखते रहें यही दुआ है

........संजय सेन सागर

रंजना 14 मई 2009 को 5:10 pm

Ha ha ha ha ......bahut bahut majedar....

Bahut lajawaab vyangy hai.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 15 मई 2009 को 2:20 pm

Raj Bhatia मुझे को
विवरण दिखाएँ ११:४४ (2 घंटे पहले)

नमस्कार,
आप का लेख पढा, बहुत अच्छा लगा, ओर हंसी भी आई, अभी मुझे अपनी मां की तबीयत लेकर बहुत ही पेरशानी है,समझ मै कुछ नही आ रहा कि कया करे? इस कारण मै कोई टिपण्णी नही दे पा रहा, ओर ना ही कोई लेख लिख रहा हुं, लेकिन आप का यह लेख पढ कर कई दिनो बाद चेहरे पर मुस्कान आ गई.
धन्यवाद
राज भाटिया