
"25 April 2009 हिन्दी ब्लोग जगत मे टीपणीकारो का भयकर अभाव :व्यग" नामक एक व्यग को मेने अपनी सोच के हीसाब से पिरोया था। मेरे चिठठा दोस्तो ने मेरे इस व्यग को सराह भी। परन्तु एक बेनामी भाईसाहब या बहनजी को मेरे व्यग मे जिन्ह प्रतिष्टीत लोगो का नाम मैने लिया वो उनके गले कि फॉस बन गया, या यू कहू कि उनका नाम नही देख ईर्ष्यावश अपना दिमागी सन्तुलन को सम्भाल नही पाये और बेनामी बनके आगऐ अपने मन कि भडास निकालने। देखे तो वो कैसे कुन्ठित मन से लिखते है। आप भी पढे।
"बेनामी ने कहा…
naam tiger kam gidad ka. ye jo nam likhe hain, inko tel lagane se behtar hai naye ane walo ka swagat karo. badiya parosoge to naye log judege. in namo ki chamachagiri karane se kuchh nahi milanewala.
April 26, 2009 11:47"
सबसे पहले तो आप जो भी है जान ले कि मैने आपकी टिपणी प्रसारित कर दी है, जो आप समझ ले की
"टाईगर" वाला कार्य तो मैने कर ही दिया है।
रही बात गिदड कि तो वो आपने बेनामी पृष्ट्भूमि से टिपणी कर अपने आपको गिदडो कि जम्मात मे शामिल करने से बच नही पाऐ।
और आप यह भी समझे ले कि तेल आप जैसो को नही लगाया जाता क्यो कि तेल कि भी कोई ईज्जत होती है और फिर महगा भी तो है ।
भाई नाम लिख देते तो हम आपकी भी चमचागिरी कर देते अब बिना नाम वाले आशिक के क्या हॉल हो वो तो आप जानते ही है।
रही बात नये चिठाकारो कि तो आप उनकि चिन्ता छोडेये वो काबिल है अपने बुते पर नाम कमाने के लिऐ।
भगवान आपको सद्धबुद्धी दे और क्या मागु आपके लिऐ ?
नोट- यह बेनामी जो होते है वो नामी गिरामी ही होते है। पर उनके बुरे कार्य, बुरे विचार, कुन्ठीत-मन, जलस, उन्हे बेनामी बना देते है- बेचारो के कर्म ही खराब होते है जो सुन्दर मानव जीवन को बेनामी होकर जीते है।
विशेष यह चिठ अगर आशिषजी खण्डेलवालजी पढ रहे है तो मेरा निवेदन इस बेनामी वायरस का कैसे पता लगाया जाये ? ब्लोग जगत के इस ऑतकवाद से निपटने के लिऐ क्या हमारी टेक्निकल टीम तैयार है। अगर नही तो भविष्य के लिऐ चिन्तनिय विषय है।
सभी बन्धु इस बात कि सज्ञान ले और बेनामी के इस कृत्य कि भरसना करे भर्त्सना ताकि भविष्य मे कोई भी हिन्दी चिठाकारा को इस तरह कि मानसिक परेशानीयो से नही झुजना पडे।