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बैंगलोर से मेरा पुराना नाता, गार्डन सिटी" कब "पत्थरो की नगरी बन गई!!

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इन्ह दिनों बाहर  रहने का अवसर मेरे लिए कुछ अधिक था! मित्र के घर के मोहरत के सिलसिले में मुझे बैंगलोर जाना पडा . मेरे मित्र, रिश्ते में मेरी बहिन के देवर है . "राजाजी-नगर" में मित्र ने तीन मंजिला बिल्डिग बनाई जो सुन्दर एवं योजनाबद्ध ढंग से बनाई गई है.  बैंगलोर का यह क्षेत्र (राजाजी नगर) सुहाना, सुन्दर एवं साफ़   सुथरा लगा. हां इस क्षेत्र के ब्रिज के निचे ट्राफिक  जाम से मार्केट आने-जाने में बहुत अधिक समय जरुर लग जाता है  !

वैसे बैंगलोर से मेरा पुराना नाता है. गली-गली घूम चुका हु. दस-पन्द्रहा सालो में  बैंगलोर में काफी कुछ बदलाव आया है. विकास भी हुआ है. बहुत बढ़  सा गया है. कई किलोमीटर दूर तक लोगो ने अपना बसेरा बसा लिया है.  कुछ वर्ष  पूर्व बसंतगुडी, जयनगर जो चिकपेट एवं शहर से मात्र ५-६ किलोमीटर दुरी   पर स्थित है लोग दूर बताते थे आज वो ही स्थान बैंगलोर के बीचोबिच में विद्यमान हो गया है. समय कितना तेजी से चला पता ही नहीं चला. "गार्डन सिटी" कब "पत्थरो की नगरी" बन गई, पता ही नहीं चला!.

ट्राफिक समस्या से अभी तक लोगो को निजात नहीं मिल पाई है. जबकि सरकार ने बहुत सारे नए ब्रिज बनाए है. कई रास्तो को "वन वे" कर दिया है. फिर भी ट्राफिक  समस्या "सुर्पनका" की तरह मुह फैलाए खड़ी है.

हां! एयर पोर्ट रोड को काफी आधुनिक बना दिया है. एयरपोर्ट से सिटी आने के लिए मैसूर बैंक तक "ऐ,सी बसों" की अच्छी सुविधा होने की वजह से रिक्शा-टेक्शी वालो की मनमानी पर लगाम जरुर लगा गई है.
रेलवे के हालत भी बुरे ही है - "कंट्रोमेंट से बैगलोर" पहुचने के लिए ट्रेँन को ४५ मिनट लगते है. जबकि मुश्किल से यह रास्ता मिनट का है. वैसे प्लेट -फॉर्म खाली ना होने का बहना  बनाकर रेलवे मंडल क्या साबित करना चाहती है ?  समझ के परे है. कई मायनों में बैंगलोर विश्व स्तरीय माना जा सकता है पर नागरिक सुविधाओं कि कमी के कारण समय की अपव्यता चिंता का कारण है. इनफ़ोसिस , विप्रो , एच सी एल  जैसी  बड़ी कम्पनियों के कारण लाखो जॉबकर्ता देश-विदेश से बैंगलोर में निर्वासित है. इन्ही लोगो  की भारी तादाद ने बैंगलोर में प्रोपर्टी की कीमतों में उछाल लाने में साहयता की है तो सरकारी खजाने को  टेक्स  से लाबाबब कर दिया है. पर रात को ११=३० बजे के बाद उन्हें राहगीरों को खाने पिने को होटले या सड़क पर खुमचे नहीं लगे मिलते है क्यों कि यहाँ का प्रशासन एवं पुलिस इसके लिए तैयार नहीं है. हां फाइव स्टार होटल  रात भर खुला मिलेगा. पर लोग रात को १२ बजे के बाद घरो से निकल कर टहलते नहीं है बैंगलोर में शायद पुलिस्या डर ? हां रात को कभी जोरदार भूख लगा जाए तो घबराए नहीं रेलवे स्टेशन चले जाए वंहा की "केंटिन" में देर रात  तक स्वादिष्ट भोजन मिल जाएगा. "एमजी रोड " पर घूमने एवं शापिंग करने का आनंद कुछ ओर ही है. मुझे तो "सुखसागर" की पाँव भाजी बड़ी ही लजीज लगी. वैसे यह मुंबई "सुखसागर" की ही ब्रांच है.

आज मुंबई पहुचा ! लगे हाथो "रघुलिला शापिग  मोंल" में पत्नी के साथ "माई नेम इज खान" देखने बैठ गया ! पिच्चर से एक सन्देश जरुर मिलता है -
" दुनिया में दो ही तरह के इन्शान होते है - एक अच्छा इसान, दूसरा बुरा इंसान."
हिन्दू, मुश्लिम, जैन, सिख, इसाई यह सभी तो इंसानों कि इंसानों के लिए बनाई हुई खाई ! कुल मिलाकर फिल्म एक सामाजिक सन्देश देने में सक्षम हुई. शाहरुख खान को एवं काजोल को बधाई. वैसे करण जोहर भी इसके हकदार है.
बालासाहेब का आभार की वो "माई नेम खान" पर प्रतिबन्ध नहीं लगाते तो मै इतना उत्सुक नहीं होता यह पिक्चर देखने के लिए नही जाता .
कल  मेरे ब्लोगर मित्र विवेक रहस्तोगीजी की शादी की सालगिरह थी. फोन  मिलाया शुभाकामानो के लिए तो वो मद्रास में थे. काफी लम्बी बात चली.   मैंने उन्हें एवं भाभीजी को शुभ-कामनाए प्रेषित की.
वन्दना गुप्ताजी की १५ फरवरी को शादी की सालगिरह थी. वंदनाजी की कविताओं का मै बड़ा फैन हु एक बार चैट पर बात हुई थी.   वंदनाजी को हार्दिक शुभ कामनाए ....
वैसे अरविन्द जी मिश्रा की भी कल १८ फरवरी को  शादी की   सालगिरह मनाई गई उन्हें भी मै प्रणाम करते हुए मंगल कामनाए प्रेषित करता हु.
कल सुबह मै फिर कही नई  यात्रा पर निकल चुका होउगा जब आप यह पोस्ट पड़ेगे. नमस्ते....

मुंबई मेरे ताऊ की

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यह सवाल ही बेकार है की मुंबई किसकी है ?  दुनिया में कैलफोर्निया से लेकर कालाहांडी तक ओर मुंबई से लेकर म्यूनिख तक हजारो ऐसी जगह है जिनका एक नाम है. और जंहा इंसानों की छोटी मोती आबादी बसती है.

यह सवाल आपके मन में भी होगा जैसा अब तक सब गलत फहमी के शिकार थे की मुंबई हम सब की किन्तु अफ़सोस हमारी सोच बेकार निकली. ऐसा सवाल हर जगह तो नहीं उठ रहा है.  यह सभी  जानते है की कोनसा गाव या शहर किसका है और किसका उस पर कितना अधिकार है. इसलिए मुद्दा यह है की यह सवाल कोंन उठा रहा है ?  जब यह सवाल एक बच्चे से पूछा गया की मुंबई किसकी तो उसने तपाक से कहा -" मेरे ताऊ की है मुंबई."

मुबई सिर्फ ओर सिर्फ मराठियों की है. यह बात कई मर्तबा दशको पूर्व से राग-अलापा जा रहा है. चव्हाण साहब यहा के मुख्यमत्री थे तब राजस्थानियों को बोम्बे छोड़ राजस्थान जाने की चेतावनी मिली थी. तब  राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मोहनराज सुखाडिया महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, श्रीमती  इंदरा गांघी के बिचबचाव से मामला शांत हुआ. अब ठाकरे  परिवार के सदस्य उसी बात को दोहरा रहे है.  यदि वो ऐसा कह रहे है की मुंबई महाराष्ट्रवालो की है तो मुंबई उन्हें दे देनी चाहिए. यह लेंन  देंन जवाबी ही होना चाहिए. कानूनी तोर पर यह हो नहीं सकता. अगर पिछले चुनाव में उन्हें सीटे ज्यादा मिली होती तो  सरकार भी दे दी जाती.

ओर यूपी-बिहार वासियों के प्रति वो ही  जहर उगला जा रहा है.  ठाकरे परिवार के सदस्य, अमिताभ,सचिन तेंदुलकर, मुकेश अम्बानी, शाहरुख खान पर इसलिए दहाड़ते  है की ये लोग मुबई को भारत का हिस्सा बताते है ओर कहते है की मुंबई आम भारतीयों की है. किसी एक जाती, भाषा रंग, में उसे नहीं बाटा जा सकता है. मुंबई पर ही नहीं पुरे देश के कोने-कोने पर भारत के आम नागरिक का बराबर का हिस्सा है. पर शिव-सेना, मनसे के नेता  मराठियों की हमदर्दी पाने की राजनीति के माध्यम से अपना अपना वोट बैंक तैयार करने में लगे हुए है. लगे हाथो राहुल बाबा भी बहती गंगा में (राजनीतिक कुंड) में हाथ घोने बैठ गए, ओर बिहारियों की हम दर्दी लुटने की फिराक में देश में प्रांतवाद की हवा को फुकने का काम किया है.  यह कैसी राजनीति ? मानवता ओर मानवीय भावनाओं का यह कैसा बलात्कार  ?  यह कैसा प्रातंवाद ?

रतन टाटा के उस कठोर निर्णायक फैसले से सभी प्रवासियों को एक सबक लेना  चाहिए जब शिन्गुर (कोलकत्ता) में नैनो के प्रोजेक्ट को लेकर गन्दी राजनीति शुरू हुई तो रतन टाटा ने करोडो की सम्पति को तिलांजलि देकर वहा से हट गए  तब केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की पेंट गीली हो गई. क्यों ना आत्मसमान से जिया जाए ? क्यों ना रतन टाटा के निर्णय को मुंबई में रहने वाले अप्रवासी सामूहिक रूप से फ़ॉलो करे ? करना चाहिए  तभी नानी याद आएगी ? यह राजनीतिज्ञो के लिए महत्वपूर्ण सवाल है वरना यह  बेकार बहस से ज्यादा कुछ नही है.
जय हिंद जय महाराष्ट्रा

इतना प्यार आर्शीर्वाद-हिन्दी ब्लोग जगत में ही सम्भव है.

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मेरा परिचय कोई खास नही है। हिन्दी हिन्दुस्थान को मै प्यार करता हू। मुझे लिखने का शोक है। किताबे पढने कि ललक हमेशा ही बनी रहती है। ज्यादा कुछ लिखना आता नही बस देसी दिमाग मे जो भी चलता है कलम के माध्यम से उडेलने का काम करता हू। कलम की स्याही सूखने का नाम नही लेती। विनोबा भावे के विचारो से प्रभावित हूआ तो समाज के लिऐ कुछ छोटे मोटे कार्य करने का प्रयास करता हू।जब तक लोग पसन्द करेगे मै उनके लिऐ लिखूगा, जब वो उब जाऐगे तब मै मेरे लिऐ लिखूगा।

प्यार को मै मानव कि सबसे बडी अभिव्यक्ती समझता हू जहॉ कभी कही सफल हुआ तो असफल भी रहा। गुस्से को मै जीवन का अभिन्न अंग मानता हू, मेरी सोच है की मर्यादित आक्रोस सफलता का कारण बनती है एवम अनुशासनहीन आक्रोस आदमी के जीवन को समाप्त कर देती है।

कर्म मै मेरा अटुट विश्वास है पर फल कि इच्छा भी रखता हू सयमित भाव से मेरे द्वारा लिखित -
"हे प्रभु यह तेरापंथ", "मुंबई टाइगर" , "ब्लोग चर्चा मुन्नाभाई की", "द फोटू गैलेरी" , "माई ब्लोग", "महाप्रेम" , "सलेक्शन एंड कलेकशना", हिन्दी चिठ्ठो के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करता रहा हू - संजोता रहा हू।
इन्ह सभी चिठ्ठो पर समय समय पर टिप्पणियों द्वारा आपका स्नेह प्यार मिलता रहा है

मुझे लिखना अच्छा लगता है, तो लिखने के बाद आप लोगो की प्रसंसा भरी टिप्पणियों से मै उत्साहित होता हू. शायद यह मानवीय अवतरण की खूबी है या कमी मुझे नही पत्ता, पर यह सच्च है की टिप्पणियों ने ब्लोग लिखने के लिए मुझे प्रेरित भी किया या यु कहू तो कोई अतिशयोक्ति नही की टिप्पणियों ने मेरे लिखनेकी सक्रियता को लालस प्रदान किया।

हिन्दी चिठाकारी ने मुझे अपने आपको अभिव्यक्त करने का सुनहरा मोका प्रदान किया दूसरी और देश -विदेश में कई लोगो से परिचय कराया, नए मित्रो से मिलवाया एवं एक अटूट विशवास भरा सम्बन्ध बनवाने में हिन्दी ब्लोग जगत मेरा हमसफ़र बना।

कुछ अंतराल पूर्व कभी सोच भी नही पाता था की मै महावीर, हिन्दी भाषी व्यक्ति, अपनी बात अपने लहजे में , अपनी भाषा में , कलेजे से बहार निकाल सकूंगा। किंतु ब्लॉग ने यह सभी मुमकिन कर दिया। मेरे लिए ब्लॉग ने कई नए एवं अनूठे रास्तो को खोल दिया यह ब्लोगेर की दुनिया सपनों से कम नही थी मेरे लिए . बिना कोई खर्च किए अपने ढंग से साफ़ सुंदर अक्षरो की लिखावट बिना कोई सलवट सचित्र , कलरफुल अपने आप को संजोने का एवम व्यक्त करने का सहज सरल शुलभ अवसर हमे देती है। मुझे गर्व है की मै भी ब्लॉग संसार का हिस्सा हू.

आप सोच रहे होगे इतनी सारी अच्छाइयो के बाद बुराई कंहा है ?

बुराई ब्लोग संस्करण में या उसके फोर्मेट में कदापि नही है बुराई है कुछ लोगो की मानसिकता में उनकी सोच में
जो उभर कर यदाकदा बहार आती है और ब्लॉग जगत के वातावरण को दूषित करती रहती है। इसे लोगो की विचार धारा स्वच्छ अभिव्यक्ति की बजाय कुंठित मनोभावना से ओतप्रोत होती है। साफ़ शब्दों में कहू तो जलन -इर्छ्या उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाती है। डाक्टरी भाषा में ऐसे व्यक्तियों को मनोरोगी भी कहा जाता है। इस तरह के मनोरोगी सिर्फ़ ब्लॉग जगत में ही है इसी बात नही है, ऐसे मनोरोगी बहार या घरेलु दुनिया मे भी है. जो खुले में भी सार्वजनिक स्थानों पर अच्छे लोगो की गरिमा को ठेस पहुचाने से नही चुकते है। कई मोको पर घर परिवार के सदस्यों के साथ भी वो ऐसा ही व्यवाहर करते है।

ऐसे लोगो के मन में बच्चपन से ही यह बात दिमाग में घरकर जाती है की वे दूसरो से सुपीरियर है, कोई उनका शानी नही है समय समय पर लोगोका ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए बेतुका बवाल मचाने लग जाते है। जबकि वो लोग कार्य कुशल नही होते है इसलिए अपनेको असुरक्षत पाते हुए अपनी और अटेंशन पानेके लिए ऐसा करते है.

कल मैंने दुखी मन से एक पोस्ट लिखी मेरे असंतुलित मनको आप सभी ने पधारकर मुझे ढाढस बंधाया, मुझे हिम्मत दी की मै लिखता रहू दुःख में सात्वना - सुख में हिस्सेदारी, इतना प्यार आर्शीर्वादयह सभी हमारे हिन्दी ब्लोग जगत में ही सम्भव है। मै आप सभी का तेहदिल से शुक्रिया अदा करता हू की आपने मेरे विचारों को टूटने से बचाया। मै आप सभी को विशवास दिलाता हू की जीवन भर स्वस्थ, सयमित और अनुशासित ब्लोगरी करुगा। जिसमे किसी की भावानाए आहात नही होगी वैसी ही मर्यादित लेखनी का उपयोग करुगा। नमस्कार!

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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मेरे मम्मी पापा की wedding anniversary है तो लिखना तो पडेगा

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पको पता तो है मै लिखने मे आलसी हू। पर चुकी मेरे मम्मी पापा की wedding anniversary है तो लिखना तो पडेगा ही क्यो कि मिताली जिद्द कर रही थी। सबसे पहले आपको सभी को मेरा प्रणाम एवम आप सभी का आभार कि हमारी खुशी मे आप सामिल हुऐ और हमे बर्दास्त किया।
चुकी पापा कि यह नई ब्लोगिग दुनिया घर परिवार जैसी ही लग रही है। आप सभी का एक दुसरो के प्रति स्नेह, लगाव, देख अच्छा लगता है। आप सभी ब्लोगवासी एक दुसरो के दुख सुख मे भागीदार बनते है यह भी एक नई व्यव्स्था का सुत्रपात  है।
पापा मम्मी के बारे मे मेरी छोटी  बहन मिताली ने पापा के ब्लोग "हे प्रभु यह तेरापन्थ" पर बाते कर गई है। उसे कुछ ज्यादा ही बोलने का शोक है कुछ बोल गई हो तो उसे बच्चा समझ क्षमा कर देना। 
पापा कि शादी बडी ही मुश्किल धडी मे हुई थी जैसा की मेरे बडे पापा बताते है - २० मई १९९१ रात्री ११:३५ मुम्बई वी टी से २५० बराती के साथ ट्रेन द्वारा मद्रास के लिऐ रवाना हुऐ। सभी बडे ही खुश थे। २० कि रात २१ कि सुबह शाम ट्रेन मे मोज मस्ती से गुजरी। सभी बराती भी खुश थे। पापा तो होगे ही क्यो कि वो मम्मी को लेने जा रहे थे। यह ट्रेन मुम्बई से मद्रास पहुचने मे ३० घन्टा लेती है। यानी २२ मई को सुबह ५ बजे मद्रास सैन्ट्रल पर पहुचने वाली थी। २१ मई रात्री ११:१५ कोई अन्तरक्षी खेल रहा था , पापा के दोस्त ताश खेल रहे थे। बच्चे सो गऐ थे।  तभी बडे पापा को सुचना मिली कि चन्नैई मे राजीव गान्घी की हत्या हो गई।  कल २२ मई कि शादी है । बरात कडप्पा स्टेशन के आसपास चल रही थी। सभी के चेहेरे तनाव ग्रस्त थे। क्या होगा कैसे होगा। कैटरिग व्यव्स्था का खाना पिना भी यहॉ अन्तिम था. क्यो कि २१ मई रात का खाना तो हो चुका था। २२ मई सुबह ५ बजे तो बरात मद्रास पहुचने ही वाली थी। रात्री का समय था ज्यादातर लोगो को राजीवजी कि हत्या कि खबर देर- सवेर लगी हो इसलिऐ ट्रेन चलती रही कही रुकी नही। सभी लोग भगवान का नाम ले रहे थे । बडे पापा ओम भिक्षु जय भिक्षु कि माला गिन रहे थे। मद्रास से ठिक तीन धन्टे पुर्व तिर्थनी स्टेशन पर ट्रेन रात्री २ बजे आकर रुकी। रुकी तो ऐसी रुकी की सुबह हो गई दोपहर हो गई शाम हो गई ट्रेन चलने का नाम नही ले रही है। प्लेट फार्म खाली पडे है। दुकाने बन्द। कुछ लोगो के टोले चिल्लाते भागते हुऐ देखे जा सकते है। हमारी खाने पिने कि व्यवस्था भी खत्म हो गई थी। स्टेशन पर ना बिस्किट पानी कुछ नही। बच्चे भुख प्यास से रो रहे थे। पुरे के पुरे बराती भयन्कर टेशन मे, अब क्या होगा ? शादी होगी के नही ? बरात मद्रास पहुचेगी के नही। खाने-पिने का क्या ? २५० आदमीयो कि क्या व्यव्स्था ?  बडी ही दुविधा लग गई। फोन बन्द हो गऐ थे। लडकि वालो से सम्पर्क नही हो रहा था। मद्रास के क्या हालात है ? सभी बाते अन्धेरीगलियो कि तरह लग रही थी। आखिर भुख प्यास से बिलखते बच्चो के लिऐ बैगलोर वाले भुरोसा कुछ कैटरि वालो के साथ  तिर्थनी गॉव मे जाने का फैसला किया। सभी मे घबराहट थी। स्टेशन के बहार पहुचे सामने दुकानो मे से धुआ निकल रहा था। सडके सुन सान थी। सामने गली मे से आतकियो का झुन्ड दिखा , भुरोसा एक हाथ गाडी के सहारे छुप गऐ। छुपके छुपाते आखिर गॉव मे एक स्थानिय राजस्थानी परिवार के मुख्या से मिले जो वहॉ के तलेवर (नेता) भी थे, उन्को बताया कि किस तरह २५० बराती उनके गॉव के स्टेशन पर कल रात से फसे हुऐ पडे है भुखे प्यासे है। बच्चो के लिऐ दुध बिसिकट तक नही है । स्थानिय भाई ने कहा आप चिन्ता मत करो अब आप हमारे मेहमान हो। उनके घर पर २५० बरातियो के लिऐ चावल दाल एवम  बच्चो के लिऐ ३-४ लिटर दुध बिस्किट पानी का इन्तजाम किया एवम अपने १० कार्यकर्ताऔ को साथ लेकर बरातीयो को खाना खिलाया। ऐसे महान लोगो को मै प्रणाम करता हू। भुरोसा ने उनको खाने के पैसे भी देने कि कोशिश की पर वो नारज हो गऐ। यह हमारा सोभाग्य है कि आप ने हमे सेवा का मोका दिया।

कैसे भी करके २२ मई को शाम ५-६ कि बिच ट्रेन चन्नैई सैन्ट्रल पहुची। तीन चार एम्बुलेन्स के माध्यम से बरातीयो को  पापा  के साथ लडकी वाले ट्रिपलिकेन तेरापन्थ भवन ले गऐ। हेमामालिनी शत्रम (वाडी)  को रात मे ही खाली करना पडा। लाखो रुपऐ नानाजी के वेस्ट हो गऐ। पुरा डेकोरेशन, भोजन नास्ता, मिठाईया बसो, बेन्ड पार्टी, घोडी, VGP  खाना सभी तो बरबाद हो गया था। जैसे तैसे बिना घोडी चढे पापा का विवाह हुआ। २३ मई को पापा मम्मी को लेकर बरातीयो के साथ सकुशल मुम्बई पहुचे। उस दिन मद्रास मुम्बई सहित कई जगहो पर शादीया रद्द हुई, बराते वापिस गई पर पापा मम्मी के साथ ऐसा नही हुआ। इसलिऐ आज मम्मी पापा को happy wedding anniversar॥
आप सभी को मैने बोर किया होगा॥॥॥॥।प्लिस माफ कर देना. tankx
फिर मिलेगे जी
प्रणाम
जयेश



































यह वो ही ट्रेन है जिसमे पापा की बरात गई थी {२} मेरे फोटू मम्मी के साथ

क्या ज्ञानदत्तजी,समीरजी,भाटीयाजी,शास्त्रीजी,ताऊ, बैगाणीजी,मिश्राजी, फुरसतियाजी को मैने तेल लगाया ?

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"25 April 2009 हिन्दी ब्लोग जगत मे टीपणीकारो का भयकर अभाव :व्यग" नामक एक व्यग को मेने अपनी सोच के हीसाब से पिरोया था। मेरे चिठठा दोस्तो ने मेरे इस व्यग को सराह भी। परन्तु एक बेनामी भाईसाहब या बहनजी को मेरे व्यग मे जिन्ह प्रतिष्टीत लोगो का नाम मैने लिया वो उनके गले कि फॉस बन गया, या यू कहू कि उनका नाम नही देख ईर्ष्यावश अपना दिमागी सन्तुलन को सम्भाल नही पाये और बेनामी बनके आगऐ अपने मन कि भडास निकालने। देखे तो वो कैसे कुन्ठित मन से लिखते है। आप भी पढे।


"बेनामी ने कहा…

naam tiger kam gidad ka. ye jo nam likhe hain, inko tel lagane se behtar hai naye ane walo ka swagat karo. badiya parosoge to naye log judege. in namo ki chamachagiri karane se kuchh nahi milanewala.
April 26, 2009 11:47"


सबसे पहले तो आप जो भी है जान ले कि मैने आपकी टिपणी प्रसारित कर दी है, जो आप समझ ले की

"टाईगर" वाला कार्य तो मैने कर ही दिया है।

रही बात गिदड कि तो वो आपने बेनामी पृष्ट्भूमि से टिपणी कर अपने आपको गिदडो कि जम्मात मे शामिल करने से बच नही पाऐ।

और आप यह भी समझे ले कि तेल आप जैसो को नही लगाया जाता क्यो कि तेल कि भी कोई ईज्जत होती है और फिर महगा भी तो है ।

भाई नाम लिख देते तो हम आपकी भी चमचागिरी कर देते अब बिना नाम वाले आशिक के क्या हॉल हो वो तो आप जानते ही है।

रही बात नये चिठाकारो कि तो आप उनकि चिन्ता छोडेये वो काबिल है अपने बुते पर नाम कमाने के लिऐ।

भगवान आपको सद्धबुद्धी दे और क्या मागु आपके लिऐ ?

नोट- यह बेनामी जो होते है वो नामी गिरामी ही होते है। पर उनके बुरे कार्य, बुरे विचार, कुन्ठीत-मन, जलस, उन्हे बेनामी बना देते है- बेचारो के कर्म ही खराब होते है जो सुन्दर मानव जीवन को बेनामी होकर जीते है।

विशेष यह चिठ अगर आशिषजी खण्डेलवालजी पढ रहे है तो मेरा निवेदन इस बेनामी वायरस का कैसे पता लगाया जाये ? ब्लोग जगत के इस ऑतकवाद से निपटने के लिऐ क्या हमारी टेक्निकल टीम तैयार है। अगर नही तो भविष्य के लिऐ चिन्तनिय विषय है।

सभी बन्धु इस बात कि सज्ञान ले और बेनामी के इस कृत्य कि भरसना करे भर्त्सना ताकि भविष्य मे कोई भी हिन्दी चिठाकारा को इस तरह कि मानसिक परेशानीयो से नही झुजना पडे।

इण्डियन इन्टरनेशनल फैशन ज्वेलरी और एक्ससरी शो कि झलक

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IIfjs.com इण्डियन इन्टरनेशनल फैशन ज्वेलरी और एक्ससरी शो कि झलक

IIfjs.com इण्डियन इन्टरनेशनल फैशन ज्वेलरी और एक्ससरी शो २२ से २५ जनवरी २००९ को मुम्बई एग्जिबिशन सैन्ट्रर मुम्बई मे किया था। यह देश विदेश का एक मात्र फैशन ज्वेलरी और एक्ससरी का एग्जिबिशन है जो प्रति वर्ष मेरी कम्पनी रेडीयन्ट इवेन्टस द्वारा आयोजत होता है। इसमे दुनिया भर के व्यापारी भाग लेते है। देशी- विदेशी करीब ८४०० ट्रेडर एवम २५ हजार विजिटर इस मेले मे खरीदारी मे आते है तीन दिन मे कुल कारोबार करोडो डोलर मे पहुचता है। इसमे भाग लेने वाले मुख्य देश है भारत्, इटली, अफ्रिका, आस्ट्रेलिया, दुबाई, श्री लका, पाकिस्थान्, अफगानिस्थान्, भुटान्, शिगापु‍र सहित अन्य देश है।

कम्पनी के चेयरमेन श्री देवराज सेमलानी के अनुसार २०१० मे और भी अधिक विदेसी ग्राहको को भारत लाने के हमारे प्रयास रहेगे। और ३५% अधिक यानी २००० करोड का व्यापार होने का अनुमान है।

इस शो मे भाग लेने वाले भारतीय व्यापारियो के तो होसले बुलन्द है । उन्हे विदेशीयो से वर्ष भर तक का आर्डर मिल गया है जिससे वो व्यस्त हो गऐ है।

कोई भी आर्ट ज्वेलरी का काम करता है और इस मे भाग लेना चाहता है या एग्जिबिशन सैन्ट्रर मे अपना स्टॉल बुक कर अपना प्रोडेक्ट् को दुनिया भर मे बेचना चाहता है तो इस मेल Email abhishek@radiantevents.in के माध्यम से सम्पर्क कर सकता है।

महावीर सेमलानी

मन के मोती

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मै एक ऐसा भारत बनाउंगा जिसमे गरीब लोग भी अनुभव करेंगे की यह उनका देश है। जिसके निर्माण में उनकी आवाज का महत्व है, जिसमे ऊंच-निच नही होगी, जिसमे सभी मिलजुल कर रहेगे । -महात्मा गांघी

दुख पर तरस खाना मानवीयता है, दू:ख दूर करना देवता तुल्य है.


तीन सबसे बड़ी उपलब्धिया जो मनुष्य को दी जा सकती है, वे है
शहीद, वीर और संत