क्या ज्ञानदत्तजी,समीरजी,भाटीयाजी,शास्त्रीजी,ताऊ, बैगाणीजी,मिश्राजी, फुरसतियाजी को मैने तेल लगाया ?

30 comments



"25 April 2009 हिन्दी ब्लोग जगत मे टीपणीकारो का भयकर अभाव :व्यग" नामक एक व्यग को मेने अपनी सोच के हीसाब से पिरोया था। मेरे चिठठा दोस्तो ने मेरे इस व्यग को सराह भी। परन्तु एक बेनामी भाईसाहब या बहनजी को मेरे व्यग मे जिन्ह प्रतिष्टीत लोगो का नाम मैने लिया वो उनके गले कि फॉस बन गया, या यू कहू कि उनका नाम नही देख ईर्ष्यावश अपना दिमागी सन्तुलन को सम्भाल नही पाये और बेनामी बनके आगऐ अपने मन कि भडास निकालने। देखे तो वो कैसे कुन्ठित मन से लिखते है। आप भी पढे।


"बेनामी ने कहा…

naam tiger kam gidad ka. ye jo nam likhe hain, inko tel lagane se behtar hai naye ane walo ka swagat karo. badiya parosoge to naye log judege. in namo ki chamachagiri karane se kuchh nahi milanewala.
April 26, 2009 11:47"


सबसे पहले तो आप जो भी है जान ले कि मैने आपकी टिपणी प्रसारित कर दी है, जो आप समझ ले की

"टाईगर" वाला कार्य तो मैने कर ही दिया है।

रही बात गिदड कि तो वो आपने बेनामी पृष्ट्भूमि से टिपणी कर अपने आपको गिदडो कि जम्मात मे शामिल करने से बच नही पाऐ।

और आप यह भी समझे ले कि तेल आप जैसो को नही लगाया जाता क्यो कि तेल कि भी कोई ईज्जत होती है और फिर महगा भी तो है ।

भाई नाम लिख देते तो हम आपकी भी चमचागिरी कर देते अब बिना नाम वाले आशिक के क्या हॉल हो वो तो आप जानते ही है।

रही बात नये चिठाकारो कि तो आप उनकि चिन्ता छोडेये वो काबिल है अपने बुते पर नाम कमाने के लिऐ।

भगवान आपको सद्धबुद्धी दे और क्या मागु आपके लिऐ ?

नोट- यह बेनामी जो होते है वो नामी गिरामी ही होते है। पर उनके बुरे कार्य, बुरे विचार, कुन्ठीत-मन, जलस, उन्हे बेनामी बना देते है- बेचारो के कर्म ही खराब होते है जो सुन्दर मानव जीवन को बेनामी होकर जीते है।

विशेष यह चिठ अगर आशिषजी खण्डेलवालजी पढ रहे है तो मेरा निवेदन इस बेनामी वायरस का कैसे पता लगाया जाये ? ब्लोग जगत के इस ऑतकवाद से निपटने के लिऐ क्या हमारी टेक्निकल टीम तैयार है। अगर नही तो भविष्य के लिऐ चिन्तनिय विषय है।

सभी बन्धु इस बात कि सज्ञान ले और बेनामी के इस कृत्य कि भरसना करे भर्त्सना ताकि भविष्य मे कोई भी हिन्दी चिठाकारा को इस तरह कि मानसिक परेशानीयो से नही झुजना पडे।

30 comments

Shastri 27 अप्रैल 2009 को 7:21 pm

"यह बेनामी जो होते है वो नामी गिरामी ही होते है। पर उनके बुरे कार्य, बुरे विचार, कुन्ठीत-मन, जलस, उन्हे बेनामी बना देते है- बेचारो के कर्म ही खराब होते है जो सुन्दर मानव जीवन को बेनामी होकर जीते है।

विशेष यह चिठ अगर आशिषजी खण्डेलवालजी पढ रहे है तो मेरा निवेदन इस बेनामी वायरस का कैसे पता लगाया जाये ? ब्लोग जगत के इस ऑतकवाद से निपटने के लिऐ क्या हमारी टेक्निकल टीम तैयार है। अगर नही तो भविष्य के लिऐ चिन्तनिय विषय है।"

अरे भईया, आप सडक चलते हो, पैर में मैला लग जाता है. कितना भी संभल कर चलो, मैला लग ही जाता है. लेकिन न तो आप सडक चलना बंद करते हो, न ही सडक का मैला साफ करना आपका या मेरा काम है.

जितने अज्ञात टिप्पणीकार हैं वे चिट्ठाजगत के मैल हैं. आप क्यों उनके मारे परेशान हो रहे हो? ये न होते तो आप को और मुझे साफ रास्ते की कीमत कैसे पता चलती!!

सस्नेह -- शास्त्री

Shastri 27 अप्रैल 2009 को 7:21 pm

"यह बेनामी जो होते है वो नामी गिरामी ही होते है। पर उनके बुरे कार्य, बुरे विचार, कुन्ठीत-मन, जलस, उन्हे बेनामी बना देते है- बेचारो के कर्म ही खराब होते है जो सुन्दर मानव जीवन को बेनामी होकर जीते है।

विशेष यह चिठ अगर आशिषजी खण्डेलवालजी पढ रहे है तो मेरा निवेदन इस बेनामी वायरस का कैसे पता लगाया जाये ? ब्लोग जगत के इस ऑतकवाद से निपटने के लिऐ क्या हमारी टेक्निकल टीम तैयार है। अगर नही तो भविष्य के लिऐ चिन्तनिय विषय है।"

अरे भईया, आप सडक चलते हो, पैर में मैला लग जाता है. कितना भी संभल कर चलो, मैला लग ही जाता है. लेकिन न तो आप सडक चलना बंद करते हो, न ही सडक का मैला साफ करना आपका या मेरा काम है.

जितने अज्ञात टिप्पणीकार हैं वे चिट्ठाजगत के मैल हैं. आप क्यों उनके मारे परेशान हो रहे हो? ये न होते तो आप को और मुझे साफ रास्ते की कीमत कैसे पता चलती!!

सस्नेह -- शास्त्री

श्यामल सुमन 27 अप्रैल 2009 को 7:31 pm

ऐसी टिप्पणी जो करे न दें उसपर ध्यान।
अच्छी रचना के लिए बना रहे सम्मान।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 27 अप्रैल 2009 को 7:50 pm

मुम्बई टाइगर जी!
आपका कहना सही है।
गीदड़ वास्तव में बेनामी ही होते हैं।
आप तो राजा ही रहेंगे।
अभी तीन दिन पूर्व एक बेनामी ने मेरे चिट्ठे http://uchcharan.blogspot.com/ की एक पोस्ट पर भी मेरे स्वाभिमान को ललकारने वाली टिप्पणी की थी।
ईश्वर जाने या भाई आशीष खण्डेलवाल जाने कि यह गीदड़ कौन था? फिर इसको हवा देने वाला भी सामने आ गया। आपकी तरह से मुझे भी खुली बहस के लिए एक पोस्ट अलग से अपने ब्लाग उच्चारण पर लगानी पड़ी।
जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। लब तक इन गीदड़ों को लताड़ नही लगाई जायेगी। ये बाज आने वाले नही हैं।
आप निराशा को मन में पनपने न दें। ब्लाग-जगत में एक से बढ़कर एक विद्वान टिप्पणीकार मौजूद हैं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 27 अप्रैल 2009 को 7:52 pm

मुम्बई टाइगर जी!
आपका कहना सही है। गीदड़ वास्तव में बेनामी ही होते हैं।
आप तो राजा ही रहेंगे।
अभी तीन दिन पूर्व एक बेनामी ने मेरे चिट्ठे हैं।http://uchcharan.blogspot.com/की एक पोस्ट पर भी मेरे स्वाभिमान को ललकारने वाली टिप्पणी की थी। ईश्वर जाने या भाई आशीष खण्डेलवाल जाने कि यह गीदड़ कौन था? फिर इसको हवा देने वाला भी सामने आ गया। आपकी तरह से मुझे भी खुली बहस के लिए एक पोस्ट अलग से अपने ब्लाग उच्चारण पर लगानी पड़ी।
जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। लब तक इन गीदड़ों को लताड़ नही लगाई जायेगी। ये बाज आने वाले नही हैं।
आप निराशा को मन में पनपने न दें। ब्लाग-जगत में एक से बढ़कर एक विद्वान टिप्पणीकार मौजूद हैं।http://uchcharan.blogspot.com/

Udan Tashtari 27 अप्रैल 2009 को 8:05 pm

चिन्ता त्यागो, मस्त रहो!!

ज्ञान 27 अप्रैल 2009 को 9:17 pm

वाह आपके कहने का मतलब यह हुया कि ऐसे बेनामी वायरस को कोई खास ब्लॉगर ही टटोल सकता है? आपकी मानसिकता का तो पता इसी बात से चल रहा है। सिवाय मुस्कुराने के कोई क्या कर सकता है

अरे जो काम आपने किया ही नहीं (तेल लगाने वाला) तो क्यों नाहक परेशान होकर दूसरों को भी बता रहें हैं कि मैं मानसिक परेशानियों से जूझ रहा हूँ

Anil 27 अप्रैल 2009 को 10:36 pm

यदि बेनामी आतंकवाद और बढ़ जाये तो बेनामी टिप्पणियों पर रोकथाम लगा देना ही बुद्धिमता है।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 12:06 am

भाई अनिल जी आपकी प्रतिक्रिया मुम्बई टाईगर पर प्राप्त हुई-आभार

मुझे पता नही था कि आप भी टेक्निकल ब्लोगर है वर्ना यह जिम्मेदारी आप पर भी सोपता।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 12:31 am

आदरणीय शास्त्रीजी

आप मुम्बई टाईगर पर पधारे व बनामी टीपणीकार की खबर ली मुझे अच्छा लगा-आपका आभार

शास्त्रीजी हॉलाकि मेरे इस ब्लोग पर मोडर्टर सिस्टम लगा हुआ है कि टीपणी को रोक सकता था पर यह मुझे इसमे सन्तुष्टी का अनुभव नही होता। जब आप जैसे वरिष्ट ब्लोगर हमारे साथ है तो हम और भी सत्यता के लिऐ लडने को ताकत हासील कर लेते है।

मुझे व्यक्ति विशेष से कोई नाराजगी नही उसके तरीके से खफा हू। यह टीपणी अगर वह नाम से भी करता तो मै ग्रहण करता।

एक बार फिर से आपका शुक्रिया।

हिमांशु । Himanshu 28 अप्रैल 2009 को 12:41 am

इन कृत्यों की भर्त्सना करने की जरूरत तो अवश्य है, पर इसका हल निकाला जाना चाहिये ।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 1:12 am

हिमांशु । Himanshu
आपका आभार,
जी हॉ हमे इसका हल ढुढना ही चाहीऐ अब जरुरी हो गया है। तकरीब सभी चिठाकार एकमत है इस ओर्

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 1:24 am

@@@आदरणीय राजजी भाटिया माता जी के स्वास्थयलाभ एवम सेवा भावना से भारत दोरे पर आऐ हुऐ। उन्होने समय निकाल कर अपनी प्रतिक्रिया देकर ई मेल द्वारा भेज है।
..................................................
*****Raj Bhatia
मुझे को
नमस्कार, भाई, इन बेनामियो को बक बक करने दो, आप अपना काम करते रहे, आप का लेख मेने पढा था, बहुत अच्छा लगा, लेकिन उस मे आप ने अपने विचार ही रखे है, किसी की चमचा गिरी तो बिलकुल नही लगी, ओर फ़िर लेख लिखने के लिये कोई विषय भी चाहिये, आप ने सब से अलग ओर अच्छा विषय ढुढां तो किसी को चिढ क्यो हुयी ?? आज कल मेरा ध्यान मां की तरफ़ रहता है इस कारण ना तो कोई पोस्ट ही दे रहा हुं, ओर ना ही कोई टिपण्णी ही कर रहा हुं.
धन्यवाद, ओर आप बेवाक लिखे.
राज भाटिया
2009/4/27

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 1:31 am

राजजी,
आपका बहुत आभार कि आपने व्यस्तम समय मे से कुछ समय हमे प्रदान कर चिठाजगत कि स्वस्थ प्रणाली का प्क्ष लिया। अच्छा लगा।
विशेष आपके माताजी अब कैसे है ? आपकी भारत यात्रा सफल हो एवम माताजी का आर्शिवाद सदैव आपके साथ हो "हे प्रभू" एवम 'मुम्बई टाईगर' कि मगल कामना।

लवली कुमारी / Lovely kumari 28 अप्रैल 2009 को 9:48 am

इससे पहले वाला आलेख मैंने नही पढ़ा है, यही कहना चाहूंगी की यदि आप किसी टिप्पणी को अपमानजनक समझतें हैं, तब मोडेरेसन की सुविधा गूगल ने दी है उसका उपयोग करें .

ताऊ रामपुरिया 28 अप्रैल 2009 को 10:23 am

आपने हिम्मत का काम किया है.जो इस बात को सार्वजनिक किया. और ये विघ्नसंतोषी आपको जीवन मे हर जगह मिलेंगे.

पर महावीर जी आप आचार्य्श्री के शिष्य होकर भी क्युं इन लोगों की बातों पर ध्यान देते हैं?

क्या आप कोई बिजली की वस्तु हैं जो आपका स्विच दबा दिया और आप चालू हो गये?

मेरी राय है और मैं इसका पालन करता हूं कि बेनामी की बातों का जवाब नही दिया जाना चाहिये. हां अगर कोई अपनी पहचान के साथ आता है तो हर तरह से उसका स्वागत है.

पर बेनामी तो ऐसा है कि सामने वाला तो दिखाई ही नही दे रहा है तो आप किसको जवाब देंगे? उस व्यक्ति का उद्देष्य ही आपको अपने कर्तव्य से डिगाना है और वो सफ़ल भी हुआ.

और ये तो गनीमत है कि इन बेनामी साहब ने आपको तेल लगाने वाला ही कहा. एक जगह तो इन्होने इतनी निर्मल और पवित्र गालियां लिखी हैं कि कोई शाश्त्र भी उसका मुकाबला नही कर सकता.

हां आपको बहादूर इस लिये कह रहा हूं कि आपने मोडरेशन के बावजूद इसे सार्व्जनिक किया और उन महोदय ने उस पोस्ट को ही निकाल दिया जबकी वो गाली पुराण वहां रात भर रहा. कई लोगों ने उसे देखा भी है.

खैर मेरी राय तो यही है कि आप इनको महत्व ही ना दें.

रामराम.

लवली कुमारी / Lovely kumari 28 अप्रैल 2009 को 11:26 am

भाई जी आपका पिछला आलेख पढ़ा.मैं फोटो लगा दूँ की की कैट वाक करूँ कोई मेरे ब्लॉग में टिप्पणी नही करता ऐसे ही.जो मुझे जानते हैं (ढाई सालों में) वो जानते होंगे बकवास का कोई फ़ायदा नही होने वाला, जो नही जानते वो जान जाते हैं,एक दो टिप्पणियों के बाद कोई फ़ायदा नही होने वाला यहाँ मेहनत से टिपटिपा कर. पहली बात मैं उन्ही टिप्पणियों पर ध्यान देती हूँ जो विषय से सम्बंधित होते हैं ..दुसरे फालतू की बकबक करने वाले टिप्पणी और टिप्पणीकारों की तरफ मेरा आना -जाना कम ही होता है ..आप मेरी टिप्पणियों पर ध्यान दे तो यह पता चल जायेगा.
दुसरे यहाँ मेरे ढाई साल होने जा रहे हैं तो मुझे इन हरकतों की जरुरत महसूस नही होती है की मैं आकर्षक फोटो लगा कर टिप्पणी करने वाले का ध्यान खिंचुं. बाकि जिसे जो सोंचना है सोंच सकता है लोकतंत्र में हर कोई आजाद है सोंचने और बोलने के लिए बस ध्यान रखा जाना चाहिए की किसी की भावनाएं आहात न हो.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 12:22 pm

@लवली कुमारी / Lovely kumari ने कहा…

भाई जी आपका पिछला आलेख पढ़ा.मैं फोटो लगा दूँ की की कैट वाक करूँ कोई मेरे ब्लॉग में टिप्पणी नही करता ऐसे ही.जो मुझे जानते हैं (ढाई सालों में) वो जानते होंगे बकवास का कोई फ़ायदा नही होने वाला, जो नही जानते वो जान जाते हैं,एक दो टिप्पणियों के बाद कोई फ़ायदा नही होने वाला यहाँ मेहनत से टिपटिपा कर. पहली बात मैं उन्ही टिप्पणियों पर ध्यान देती हूँ जो विषय से सम्बंधित होते हैं ..दुसरे फालतू की बकबक करने वाले टिप्पणी और टिप्पणीकारों की तरफ मेरा आना -जाना कम ही होता है ..आप मेरी टिप्पणियों पर ध्यान दे तो यह पता चल जायेगा.
दुसरे यहाँ मेरे ढाई साल होने जा रहे हैं तो मुझे इन हरकतों की जरुरत महसूस नही होती है की मैं आकर्षक फोटो लगा कर टिप्पणी करने वाले का ध्यान खिंचुं. बाकि जिसे जो सोंचना है सोंच सकता है लोकतंत्र में हर कोई आजाद है सोंचने और बोलने के लिए बस ध्यान रखा जाना चाहिए की किसी की भावनाएं आहात न हो.


सम्माननीय लवलीजी
नमस्कार।
आभार कि आप ने आकर हमे सम्भाला।
मेरा मकसद आलेख मे किसी का भी या आपका भी कोई दिल दुखाने का मकसद नही था, आप लोगो की लेखनी प्रभावित हू इसलिए मात्र थोडी सी व्यगात्मक हसी लानी कि कोशिश कि थी। आप नाराज ना हो
आपके प्रति मेरे मन मे आदर के भाव रखता हू । आप अन्यथा न ले। मेरी कोई बात से आपकी भावनाओ को ठेस लगी हो तो लवलीजी क्षमा करे।

कृपा दृष्टी बनाऐ रखे।

आपका

महावीर बी सेमलानी "भारती

मुम्बई टाईगर

हे प्रभु यह तेरापथ

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 12:31 pm

@लवली कुमारी / Lovely kumari ने कहा…
इससे पहले वाला आलेख मैंने नही पढ़ा है, यही कहना चाहूंगी की यदि आप किसी टिप्पणी को अपमानजनक समझतें हैं, तब मोडेरेसन की सुविधा गूगल ने दी है उसका उपयोग करें .
........................

लवलीजी
आप सही कहती है मोडेरेसन की सुविधा का उपयोग करना चाहिऐ था। मेरे इस ब्लोग मे यह सिस्टम लगा हुआ है।
पर काफी समय सोचने के बाद उसे एक ब्लोग के स्वथ्य लोकतान्त्रिक परम्परा को कायम रखते हुऐ मुझे यह कदम उठाना पडा।
डर के तो काम कैसे चलेगा ? आपलोगो का साथ रहा तो यह बेनामीयो को सुधरना ही पडेगा।
आपका आभार वैचारीक सहयोग के लिऐ.....

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 28 अप्रैल 2009 को 12:39 pm

@ताऊ रामपुरिया ने कहा…
आपने हिम्मत का काम किया है.जो इस बात को सार्वजनिक किया. और ये विघ्नसंतोषी आपको जीवन मे हर जगह मिलेंगे.
................
आदरणियरामपुरियाजी,
आपका आभार कि आपने स्वस्थ ब्लोग जगत एवम उसके लोकतान्त्रिक भावनाऔ का पक्ष रखा।
कोई भी बेनामी व्यक्ति से डर डरकर कब तक नही लिखा जा सकता है?
रही बात मै और भी मजबुती से लिखता रहुगा अगर आपका शास्त्रीजी, भाटियाजीका समीरजी का आदि लोगो के आर्शिवाद, और प्यारबना रहा तो ......आपका पुन शुक्रिया जी।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" 28 अप्रैल 2009 को 4:04 pm

महावीर जी, आप नाहक परेशान हो रहे हैं. ये ब्लागजगत भी एक तरह से हमारे इस समाज का एक लघु रूप ही है,जहां अच्छे-बुरे प्रत्येक तरह के लोग मौजूद है.जिनमें हरेक व्यक्ति का अपना सोचने का एक नजरिया है. इसलिए बिना किसी चिन्ता के स्वछंद होकर जिए,जिस प्रकार कि आप समाज में जीते हैं.

मोहन वशिष्‍ठ 28 अप्रैल 2009 को 4:07 pm

वाह जी वाह बधाई हो आप तो इसका मतलब छाने लगें हैं बस एक बात याद रखना जब आप बुलंदियों पर होते हो तो बहुत से लोग होते हैं जो आपकी टांग को खींचेंगे तो आप नाराज काहे होते हो इससे स्‍पष्‍ट हो रहा है कि आप वाकई बुलंदी पर जा रहे हो और इस तरह के जो लोग होते हैं वो टांग पकड कर खींचना चाहते हैं लेकिन वो असफल होते हैं ऐसा भी करने में तो आपको तो खुश होना चाहिए कि इस तरह से बेनामी टिप्‍पणी जितनी ज्‍यादा आए उतना ही अपना कद बडा समझो

मोहन वशिष्‍ठ 28 अप्रैल 2009 को 4:07 pm

वाह जी वाह बधाई हो आप तो इसका मतलब छाने लगें हैं बस एक बात याद रखना जब आप बुलंदियों पर होते हो तो बहुत से लोग होते हैं जो आपकी टांग को खींचेंगे तो आप नाराज काहे होते हो इससे स्‍पष्‍ट हो रहा है कि आप वाकई बुलंदी पर जा रहे हो और इस तरह के जो लोग होते हैं वो टांग पकड कर खींचना चाहते हैं लेकिन वो असफल होते हैं ऐसा भी करने में तो आपको तो खुश होना चाहिए कि इस तरह से बेनामी टिप्‍पणी जितनी ज्‍यादा आए उतना ही अपना कद बडा समझो

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) 28 अप्रैल 2009 को 5:49 pm

मुंबई टाइगर जी, माफ़ कीजिएगा .. फिलहाल ऐसी कोई सुविधा नहीं है, जो बेनामी टिप्पणी की गोपनीयता को तोड़ दे। वैसे यह बात जान लें कि अगर आपने बेनामी विकल्प खुला रख छोड़ा है तो वह केवल इसलिए है कि आप किसी को गोपनीय रहते हुए टिप्पणी देने का अवसर देने को रज़ामंद है। इसका पता लगाने की कोशिश भी इस गोपनीयता को तोड़ने की श्रेणी में आएगी और एक तरह का 'नैतिक अपराध' होगा। इसलिए बेहतर होगा कि या तो आप केवल पंजीकृत पाठकों को ही टिप्पणी का अवसर दें या सभी के लिए खुला रख छोड़ा है तो उनकी गोपनीयता का सम्मान करें।

सभी पाठकों के हित में टिप्पणियों पर पूरा नियंत्रण रखने वाली पोस्ट थोड़ी देर में प्रकाशित कर रहा हूं।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 28 अप्रैल 2009 को 11:12 pm

टिप्पणियों को लेकर भावुक होने का दौर हरेक ब्लॉगर के ब्लॉगीय जीवन में एक बार जरूर आता है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सब कुछ नॉर्मल लगने लगता है। लिखते रहें जी।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 अप्रैल 2009 को 1:42 am

@आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

मुंबई टाइगर जी, माफ़ कीजिएगा .. फिलहाल ऐसी कोई सुविधा नहीं है, जो बेनामी टिप्पणी की गोपनीयता को तोड़ दे। वैसे यह बात जान लें कि अगर आपने बेनामी विकल्प खुला रख छोड़ा है तो वह केवल इसलिए है कि आप किसी को गोपनीय रहते हुए टिप्पणी देने का अवसर देने को रज़ामंद है। इसका पता लगाने की कोशिश भी इस गोपनीयता को तोड़ने की श्रेणी में आएगी और एक तरह का 'नैतिक अपराध' होगा। इसलिए बेहतर होगा कि या तो आप केवल पंजीकृत पाठकों को ही टिप्पणी का अवसर दें या सभी के लिए खुला रख छोड़ा है तो उनकी गोपनीयता का सम्मान करें।


जी। आभार॥ सम्मान ही कर रहा हू जी तभी तो हम बेनामीजी के इस सम्मान समारोह मे मिल रहे है।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 अप्रैल 2009 को 1:46 am

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

टिप्पणियों को लेकर भावुक होने का दौर हरेक ब्लॉगर के ब्लॉगीय जीवन में एक बार जरूर आता है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सब कुछ नॉर्मल लगने लगता है। लिखते रहें जी।

सिद्धार्थभाई आपने आकार सात्वना दी मुझे अच्छा लगा, आपका शुक्रियाजी।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 अप्रैल 2009 को 2:01 am

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…
वाह जी वाह बधाई हो आप तो इसका मतलब छाने लगें हैं बस एक बात याद रखना जब आप बुलंदियों पर होते हो तो बहुत से लोग होते हैं जो आपकी टांग को खींचेंगे तो आप नाराज काहे होते हो इससे स्‍पष्‍ट हो रहा है कि आप वाकई बुलंदी पर जा रहे हो और इस तरह के जो लोग होते हैं वो टांग पकड कर खींचना चाहते हैं लेकिन वो असफल होते हैं ऐसा भी करने में तो आपको तो खुश होना चाहिए कि इस तरह से बेनामी टिप्‍पणी जितनी ज्‍यादा आए उतना ही अपना कद बडा समझो
............................................
मोहनजी
अब आपकी बधाई कैसे लू समझ मे नही आ रह है। आपने दुरुस्त फरमाया इस टॉग खिचाई रस्म के बारे मे। आप लोगो के हृदय मे हिन्दी ब्लोग जगत के लिऐ जो स्नेह देखा मन भावुक हो उठा॥ आभार और आपका धन्यवाद कि आपने हिन्दी ब्लोग जगत के आन्दोलन मे अपनी सहभागीता दी।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 अप्रैल 2009 को 2:10 am

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" …आपका आभार ,

cmpershad 29 अप्रैल 2009 को 1:24 pm

बेनामी तो बेमानी है , तो इस पर समय क्यों गंवायें:)