हिन्दी ब्लोग जगत मे टीपणीकारो का भयकर अभाव :व्यग

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दिनाक २४ अप्रेल,( खबरची)

ग्रीष्मलालिन अवकाश,एवम चुनावी धमाल के कारण कई दिनो से हिन्दी ब्लोग जगत मे टीपणीकारो का भयकर अभाव हो गया है। विश्वस सुत्रो के अनुशार कई दिग्ज चिठ्ठाकारो ने तो नया माल (पोस्ट) बजार मे उतराने के लिऐ घबराऐ हुऐ है। खबरची को पता चला है कि एक बडा ब्लोग घराना तो अपनी नियमित ब्लोग प्रोडेक्सन को कुछ दिन के लिऐ स्थिगित करने का मन बना लिया है।

कुछ दिनो पुर्व तक जिस ब्लोगर को थोक बन्द टिपणीया मिलती थी, वो आजा आधे पर आ गऐ है। और छोटे ब्लोगरो कि तो इस"टिपणीया अकाल" से कमर ही टुट गई है।

हमारे सवाददाता के अनुसार कई ब्लोगो पर, पाठको के पहुचने वाला मीटर तो १०० पाठको कि सख्या बताता है, पर टिपणी २-३-या ५ तक सीमीत हो गई है। छोटे ब्लोगरो के तो हप्तो से "पाठक-पहुच" मीटर के कॉटे रुके पडे है। ब्लोगरसरकार के प्रधानमन्त्री श्री ज्ञान दत्त जी पाण्डे ने पत्र्कारो से बात करते हुऐ कहा है की-" स्थिति चिन्ताजनक है समय रहते पीड़ित ब्लोगरो को टिपणियो कि साहयता नही पहुचाई गई तो कई ब्लोगर समय से पहले टीपण्णीयो के अभाव से उजड जाऐगे, इसलिऐ मैने टिपणियामिनिस्टर समिरजी को निर्देश दिया है कि ट्रको से हेलिकोपटर से कैसे भी हो ब्लोगरो को टिपणिया मुहैया कराई जाऐ। जरुरत पडे तो उनके ब्लोग 'उडन-तस्तरी" का ट्राफिक इस और मोडे।"

ब्लोगरसरकार टिपणियो कि कमी नही होने देगी। जरुरत पडी तो महानगरो मे कई महिनो से बन्द पडे

"कॉल सेन्ट्रस" के युवक युवतियो को टिपण्णीयॉ लिख भेजने के काम मे लगाया जाऐगा।" उधर् भारत दोरे पर गऐ टिपणियो के गृह राज्य मन्त्री राजीव भाटियाजी को तुरन्त नेट पर बैठकर गरीबी रेखा के निचे वाले ब्लोगो को तुरन्त टिपणिया साहयता भेजने को कहॉ गया है।

एवम ब्लोगेरिया के प्रतिपक्ष के नेता शास्त्रीजी से भी कहॉ है कि वे बाहर गॉवो कि यात्रा कम करे, एवम टिपणियो का फ्लो बडाऐ। उधर ब्लोगरो कि नई-नई नेता बनी घूम रही रामप्यारी ने मॉग कि

"पाठकपहुच मीटर", एवम 'हिचकी मीटर' ( हिचकी मीटर- किसने कितनी टिपणिया कि ) कि उच्च स्तरीय जॉस कि जाऐ।मीटरो मे लोचा लगता है। उधर चॉन्द को लुटने गऐ हरीयाणवी ताऊ ने आकाशवाणी करते हुऐ वादा किया है -"अब वो रोज कि दस कि जगह २० टिपणीया भेजेगे।" चोखोरबाली कि सुजाताजी पारुलजी, रचनाजी, लावण्याजी, भी इस त्रासदि से चिन्तित है। लवलीजी ने तो ब्लोग पर "फुल" हटाकर अपना छाया चित्र भी टॉग दिया है। ताकि टिपणीकार बिना टिपणी किऐ ना जाऐ खाली-पिली आवक-जावक ब्लोगमीटर फोकट मे ही चलता नही रहे। एकमात्र ब्लोगर अल्पनाजी के वहॉ टिपणियो कि आवाजाही अच्छी है। बैगाणीजी तो अपने मिडिया आफिस अहमदाबाद से कल इसके बारे मे वक्तव्य देने वाले है। कन्नुजी, ई गुरु राजीव ने बिहार के बिहड जग्लो से आदमी के हाथ चिठा लिख भेजा है उसमे उन्होने कहा-" भाई समय रहते लाईन चेन्ज करली-हम लोगो ने, नही तो अभी.................? उधर इस टिपण्णीयो कि त्रासदी कि मार झेल रहे अरविन्द मिश्राजी चाईना से टिपणीया इम्पोर्ट करने के फिराक मे, ब्लोग को और मसाले दार बनाने जा रहे। कोची केरला से शास्त्रीजी ने हमारे खबरी को बताया कि-" टिपणीयो का भारी अभाव् या मन्दी का मुझे पहले से अन्देशा था, मैने इस टिपणीया मन्दी से निपटने के लिऐ ब्लोग मे कई तरह के बदलाव किऐ है। पहला बदलाव मेरा जुना पुराना फोटु बदल डाला, ब्लोग का मुख्य पृष्ट नया डाला, उसी ब्लोग मे मेरा सिक्को के कलेक्शन से जोडा, और तो पिछले कैइ दिनो ऐसे ऐसे विषयो पर लिखता हु कि लोगो को हजम नही होता और गुस्से मे एक दो टीपणी लिख मारते है, और कभी- कभी टिपणीयो मे मै स्वय भी पहुच कर कोटा पुरा कर लेता हू।"

फुरसतिया जी ने लालकिले कि दीवार पर खडे हो कर बताते है - " भाई, हमे कोई चिता नही हमारी सेटिग्स थोडि अलग ढग कि है हमारी ग्राहकी जमी-जमाई है,फिक्स ग्रहाक है। अगर टिपणीयो का यह अभाव दो तीन साल तक भी रहे तो चिन्ता कि कोनोही बात नाही हमारे पासमा प्रयाप्त टिपणीकारो का कोटा है-राम राम।"

पाठको के लिऐ २४ अप्रेल २००९ सुबह से शाम सात बजे तक के टिपणियो के ऑकडे प्रस्तुत है :-


१ पूरी में समायी-कचौरी
आज 16 Comments: : वडनेकर जी!


२ शुक्र है शोभित ह

आज 7 Comments: दर्पण साह


३ छत्तीसगढ़ की नारी-सब पर भारी

आज 09Comment राजकुमार ग्वालानी


४ प्रवक्ता, ख्वाब का दर, हथौड़ा,- पाबला

आज0 1 Comment बी एस पाबला


५ एक खुली बहस uchcharan

आज 07Comment डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक


६ चुनावी बदलाव की -

आज 08 Comments: मोनिका गुप्ता


७ आठवें जनम की आशंकायें कस्‍बा

आज 6Comments: ravish kumar


८ अस्मत का सवाल -सारथी

आज 02Comments Shastri April 22/२००९ को 13Comments:


९ बाबा-दादी की कहानी -चोखेर बाली

आज 01Comments:सुजाता April23/२००९ को 05Comments:


१० कौन है तालीबान -पंगेबाज

आज 10 Comments:arun feb 01/2009 को 10 Comments:


११ जो "आज की पसन्द"-चिट्ठा चर्चा

आज 09 Comments चिट्ठा April23/2009 को 23Comments:


१२ मानसिक हलचल

आज 20 Comments: ज्ञानदत्त पाण्डेय April 21,को 36 Comments:


१३ जरा पक्षियों की भी सुनो : ताऊ

आज 28 comments: ताऊनामा ! April 23, को 57 comments:


१४ आम आदमी तो पापी -शिवकुमार

आज 13 commentsशिवकुमार! April 22, को 20 comments:


क्षमा करे व्यग के लिए ......क्षमा करे व्यग के लिए ......क्षमा करे व्यग के लिए ......

27 comments

Ratan Singh Shekhawat 25 अप्रैल 2009 को 6:56 am

टिप्पणी मंदी से निपटने के लिए ब्लोगरसरकार द्वारा घोषित टिप्पणी पैकेज का स्वागत है |

Arvind Mishra 25 अप्रैल 2009 को 7:40 am

अच्छा समेटा है भाई !

ajay kumar jha 25 अप्रैल 2009 को 7:46 am

amaa ,miyaa, kya dhaasu likhaa hai fir kshama kaahe kee, theek hair yaar, sabko lapet liyaa hai, ek hamein hee chhod gaye...ha. ha. ha....
andaaj bahut pasand aayaa....

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र 25 अप्रैल 2009 को 9:08 am

अभी कई टिप्पणी प्रेषक ब्लॉगर अभी चुनावी फीवर से ग्रस्त है और रेस्ट कर आराम फरमा रहे है . और ऐसे भी जोधा ब्लॉगर है कि उन्हें लख्ख टिप्पणी भी फेको तो वो दूसरो को टिप्पणी भेजने में अपनी तौहीन समझते है और बाकि बढ़ती गर्मी के कारण लू के शिकार है . कोई यात्रा पे है तो कोई शादी विवाह भी करा रहे या करवा रहे है जी . हा हा हा

संजय बेंगाणी 25 अप्रैल 2009 को 9:34 am

किसी ब्लॉग पर 20 टिप्पणी आना मन्दी है?!! :)

वैसे रात के बाद सवेरा है, अतः टिप्पणियाँ भी आएगी...लिखते रहें.

Shastri 25 अप्रैल 2009 को 9:50 am

भयंकर अकाल है भैया, भयंकर. यदि एकदम से कुछ अतिरिक्त प्रबंध न किया जाये तो अकाल काई चिट्ठाकारों की कमर (नहीं, कलम) तोड देगा.

आप जैसे युवाओं से ही अब आशा है कि रोज दुगनी तिगुनी टिप्पणियां देकर स्थिति को सुधार ले!!


सस्नेह -- शास्त्री

Anil 25 अप्रैल 2009 को 10:49 am

चलिये आपका टिप्पणी-अकाल मैं ही दूर किये देता हूँ!

PN Subramanian 25 अप्रैल 2009 को 11:06 am

अरे यहाँ भी अब तक किसी ने एक भी टिपण्णी नहीं छोड़ी है. आलेख चटपटा था. आभार.

हिमांशु । Himanshu 25 अप्रैल 2009 को 12:31 pm

अच्छी तरह नजर डाली है सब पर, और खबर भी ले ली है । धन्यवाद ।

ताऊ रामपुरिया 25 अप्रैल 2009 को 3:04 pm

भाई हमको एक तरफ़ २८ टिपणि आप ही बता रहे हैं और टिपणि अकाल बता रहे हैं? :) हमारा पेट तो इतना ही बडा है.

रामराम.

मिस. रामप्यारी 25 अप्रैल 2009 को 3:06 pm

हूं..लगता है कुछ करना पडॆगा. अच्छा समेटा है अंकल.

अविनाश वाचस्पति 25 अप्रैल 2009 को 9:32 pm

हे प्रभु

टिप्‍पणी पर यदि हो मानदेय की व्‍यवस्‍था

तो मिलेंगी टिप्‍पणियां अपेक्षा से भी अधिक

करनी हो अगर दूर कहीं से भी मंदी

तो बांटना होगा धन को, न रखें बंदी

फिर देखते हैं कैसे होगी टिप्‍पणियों की तंगी

पोस्‍ट चाहे न भी हो टिप्‍पणियां नजर आएंगी रंग बिरंगी

रंग बिरंगी देखकर टिप्‍पणियां पोस्‍ट भी छाएंगी सतरंगी

समझ नारंगी पसंद का चटका मिलेगा ब्‍लॉगवाणी पर
चिट्ठाजगत भी क्‍यों रहेगा सूना, वहां भी हवाला होगा दूना।

अविनाश वाचस्पति 25 अप्रैल 2009 को 9:33 pm

हमने भेजी टिप्‍पणी और उसे टाईगर खा गया

न जाने कविता समझकर, मुंबई की यात्रा रही अधूरी।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` 25 अप्रैल 2009 को 9:37 pm

टीप्पणियाँ करना लिखनेवाले का उत्साह बढाता है उसमेँ कोई दो मत नहीँ
- लावण्या

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र 25 अप्रैल 2009 को 9:38 pm

समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : आपकी चिठ्ठा : मेरी चिठ्ठी चर्चा में

shan 26 अप्रैल 2009 को 12:43 am

बहुत सही

shan 26 अप्रैल 2009 को 12:43 am

बहुत सही

दर्पण साह "दर्शन" 26 अप्रैल 2009 को 2:00 am

badiya...

Vivek Rastogi 26 अप्रैल 2009 को 8:49 am

अच्छा है हम और हमारा ब्लाग भी मंदी के दौर से गुजर रहा है ।

ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя 26 अप्रैल 2009 को 9:30 pm

हमारे ब्लॉग पर भी लाले पड़ें है
कुछ समाधान और खोजिये

बेनामी 26 अप्रैल 2009 को 11:47 pm

naam tiger kam gidad ka. ye jo nam likhe hain, inko tel lagane se behtar hai naye ane walo ka swagat karo. badiya parosoge to naye log judege. in namo ki chamachagiri karane se kuchh nahi milanewala.

Udan Tashtari 27 अप्रैल 2009 को 2:02 pm

मंदी के इस तौर में ऐसे ही पैकेज की उम्मीद थी. अब ज्ञान जी का आदेश हुआ है तो उड़न तश्तरी से आज टिप्पणी राहत टपकाई जायेगी. :)

अविनाश वाचस्पति 27 अप्रैल 2009 को 2:55 pm

उड़नतश्‍तरी का तश्‍तरी रूपी टिप्‍पणी

उड़ाना वास्‍तव में पोस्‍टों पर राहत

बरसाना ही है

उम्‍मीद है कुछ तश्‍तरियां हमारे पाले

में भी उड़ आ पडेंगी।

अल्पना वर्मा 28 अप्रैल 2009 को 10:00 am

यह तो बहुत ही बढ़िया अपनी तरह का अनूठा व्यंग्य हुआ!
अभी देखा..मजेदार है.
वैसे कुछ भी कहें टिप्पणी ' विषय पर ही हर दिन कितने लेख लिखे जाते हैं उस पर भी खोज करता हुआ एक लेख लिखीयेगा..रोचक तथ्य मिलेंगे.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey 28 अप्रैल 2009 को 8:32 pm

अच्छा लपेटा है भाई!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 28 अप्रैल 2009 को 11:05 pm

:)

बेनामी 14 जुलाई 2010 को 5:42 pm

Pahleke jamaneme Log Kheti Kartethe, Raja Raj Karta Tha, Koi Vyapar Dhandha Karta Tha, Jo Kamai Hoti Thi Vo Shahuji Le Jata Tha, Firbhi Sab Dukhi Aur Karjdar Rahte The. Firbhi Shahuji Sabko Hisab De Sakta Tha. Kaise