लिज्ज्त और इज्जत

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सारी दुनिया में आर्थिक स्लोडाउन का शोर हो और बडी-बडी कम्पनिया और बैंको पर संकट मंडरा रहा हो , तब किसी सहकारी महिला उधम के सफल ५० वर्ष पुरे होने कि खबर से खुशी होती है। श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड कोऔपरेटिव से स्वावलम्बन ,सहकरिता और फलसफे को सीखा जा सके इसलिऐ "मुम्बई टाईगर" के ब्लोग पर प्रसारित कर रहे है ।

कभी ८० रुपये उधार ले कर शुरु किया गया महिलाओं का यह सयुक्त उद्यम आज ५०० करोड रुपये के सालाना कारोबार तक पहुच चुका है। यह करीब ४५ हजार अनपढ, अल्पशिक्षित महिलाओ कि रोजी रोटी का जरिया बना हुआ है। यह उल्लेखनिय है कि अपनी तमाम सफलताओ के बावजुद आज भी यह कुटीर उधोग ही है। सैकडो करोड के ट्र्नऑवर के बावजुद फिलहाल खुद को कॉरपोरेट ढाचे मे बदलने कि इसकी कोई योजना नही है। यहॉ आज भी मशीन का इस्तेमाल नही होता है । ताकि उनकी अनपढ, अकुशल महिला पार्टनरो का रोजगार बरकरार रहे। श्री महिला गृह उधोग ने स्थापित चाल से उल्टे वे सारे कारनामे कर दिखाऐ जिन्हे उधमिता कि आधुनिक परिभाषाओ मे पिछडा हुआ माना जाता हो ; लिज्जत पापड उधोग ने मशीनो और कॉरपोरेट कल्चर से दुरी भले ही बनाई, पर क्वालिटी, स्वाद,और हाइजिन के मामले मे कोई समाझोता नही किया।

महिलाओ को आर्थिक आजादी और इज्जत कि जिन्दगी देने वाले श्री महिला गृह उधोग से लेकर अमूल,जैसी दुसरी सहकारी सस्थाई और मुम्बई के डिब्बेवालो कि सफलताए आज के दोर मे बडा सबक है उन्ह पढी लिखी महिलाओ के लिए जो सिर्फ महिलाओ कि भलाई के लिऐ झंडे उठाऐ घूमती है और सिर्फ बाते करती है या सजिंदा विषयो को उछालकर राजनिति करती है। ईमानदारी से अगर महिलाओ के लिऐ कुछ करना है तो श्री महिला गृह उधोग से सिख लेनी चाहिऐ।

श्री महिला गृह उधोग से लेकर अमूल,जैसी सहकारी सस्थाऐ कामयाबी मुह नही चिढाती, बल्कि आधुनिक गला काट कॉरपोरेट कल्चर को यह सिखाती है कि अततःमानविय मुल्य ही किसी बिजनेस को लम्बे समय तक बाजार मे और ग्राहको के दिलो मे बनाऐ रख सकती है।

महिला गृह उधोग मुम्बई मे स्थित है; इसका कोई मालिक नही है इसमे कोई कर्मचारी नही है सभी महिलाऐ मिलजुलकर अपना काम अनुभव के हिसाब से सचालित करती है ४५००० महिलाऐ सभी मालिक भी है तो सस्था के एम्पलोई भी।

"आज "हे प्रभु यह तेरापंथ" एवम् "मुम्बई टाईगर" इस सस्था को सैल्यूट करता है।

विशेष आज से समसमायिकी एवम जवलंत मुदो पर , सभी तरह के सामाजिक गैर सामाजिक विषयो पर लेख विचारो कि प्रस्तुति "मुम्बई टाईगर" पर होगी अबतक "हे प्रभु यह तेरापंथ' पर उपरोक्त लेख, आलेख, कविता, सामजिक, राजनिति,अन्य प्रसारित हुआ करता था। "हे प्रभु यह तेरापंथ' ब्लोग चुकि धार्मिक अवधारणा लिऐ बना था। किन्तु इस पर अन्य विषयो पर भी चर्चा होती रही है चुकि "हे प्रभु यह तेरापंथ' नाम धर्म और विश्वास से जुडा है। "हे प्रभु" ब्लोग पर अबसे विवास्पद लेखो को प्रसारित नही किया जाएगा ऐसे मे अब से सारे लेख, विचार, मुम्बई टाईगर पर प्रकासित हुआ करेगे। "हे प्रभु यह तेरापंथ' अब धार्मिक, विज्ञानिक, और गैरविवादित मुदो पर ही बात होगी। आपको जो असुविधा हुई हमे खेद है। "हे प्रभु यह तेरापन्थ' कि तरह ही मुझे यानी "मुम्बई टाईगर" को आप सभी के प्यार आर्शिवाद कि अपेक्षा है। धन्यवाद॥॥"

"हे प्रभु यह तेरापन्थ'

मुम्बई टाईगर

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Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" 19 मार्च 2009 को 4:47 pm

आपको नए ब्लाग के लिए हार्दिक शुभकामनाऎं........इस चिट्ठे के जरिए किये जा रहे आपके प्रयास सफल हों.