हिन्दी का कच्चा चिट्ठा: नवभारत टाइम्स के पन्नो मे। ताऊ उड़नतश्तरी, मानसिक हलचल, व्योम के पार, शिवकुमार मिश्र के बिना कोई लेख हिन्दि चिट्ठा जगत के लिऐ पुर्ण नही ।

29 comments
ताऊ ,
उड़नतश्तरी, 
मानसिक हलचल, 
व्योम के पार, 
शिवकुमार मिश्र, 
डॉ, अमरकुमारजी, 
के बिना  कोई लेख हिन्दि चिट्ठा जगत के लिऐ पुर्ण नही ।
नवभारत टाईम्स मुम्बई आज 59 वी वर्ष गाठ मना रहा है 'हिन्दी है हम' विशेषाक मे हिन्दी जगत कि वो तमाम बाते आज चर्चा का विषय बनी। हिन्दी  चिट्ठा जगत ने आज खास स्थान पाया नवभारत के ईन्ही पन्नो मे। हमारी सहयोगी कचन श्री वास्तव ने हिन्दी  चिट्ठा जगत कि तमाम वो सख्सतियो पर चर्चा की जो ब्लोग मे आने के बाद चमक उठे है।  
भडास,मोहल्ल,नुक्ताचीनी, चोखेर बाली,पोलखोली, चव्वनीछाप,धर्म ससद,बाल सजग, सारथी,हिन्दी ब्लोग टीप्स, फुरसतियाजी इत्यादि कि चर्चा की  तो साथ ही साथ भडास के यशवन्त की हिन्दी  चिट्ठा जगत से एक लाख की कमाई का भी उल्लेख किया।  आलेख मे बताया गया है बीते 2 सालो मे 25000 हजार हिन्दी ब्लोग नेट पर आगऐ। यह बात कुछ हजम नही हुई। चुकि हिन्दी बोलने लिखने वालो कि सख्या दुनिया भर मे 68 करोड हो गई है ,वेसे मे 25000 हजार हिन्दी ब्लोग तो जन्म ले ही लेने चाहिऐ।
कचनश्री वास्तव ने शायद कोई खास जानकारी लेकर उपरोक्त आलेख नही लिखा ऐसा मुझे लगा। नही तो
ताऊ डॉट इन, उड़नतश्तरी ...., मानसिक हलचलशिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग
Vyom ke Paar....व्योम के पार....पंगेबाज,   कवि योगेन्द्र मौदगिल ,  कुश की कलम ,   घुघूतीबासूती ,  तीसरा खंबा ,  पराया देश,  और मेरा नाम भी जोड दु तो कोई नारजगी नही होनी चाहीऐ, हे प्रभु यह तेरा-पथ;  के नामो का उल्लेख किये बिना हिन्दि चिट्ठा जगत कि बात आपुर्णिय है। पर शायद स्पेज कम पड गया होगा ? फिर भी उनकी यह कोशिस रन्ग लाई, क्यो कि
सारथी एवम फुरसतियाजी एवम हिन्दी ब्लोग टीप्स को याद रखा।

नवभारत पर प्रकाशित लेख को देखे। बहुत ही सुन्दर लिखा है- कचनजी ने, जो बधाई की पात्र है। आप यहॉ उन्हे बधाई शुभकामना दे जो उन तक पहुचाई जा सके।

29 comments

Udan Tashtari 29 जून 2009 को 8:13 pm

फुरसतिया जी अमरीका में रहने लगे, यह जानकारी आज अखबार से मिली. बड़े ही गुपचुप तरीके से अमरीका आ गये और हमें खबर भी न दी..हे राम!!

डॉ. मनोज मिश्र 29 जून 2009 को 8:18 pm

achchhee khbr ,bdhai.

'अदा' 29 जून 2009 को 8:29 pm

ab isse acchi khabar kya hogi !!
baat bhi bilkul sahi hai udantastari, taau, mansik halchal ityadi ke bina vakai hindi chittha jagat poorn nahi hai,

badhai hi badhai

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi 29 जून 2009 को 8:30 pm

इसे पढ़ कर पता लगा कि फुरसतिया जी हिन्दुस्तानी कानपुर छोड़ कर अमंरीका पहुँच गए हैं और एनआरआई हो गए हैं। फुरसतिया जी को बहुत बहुत बधाई। उन्हें इस से भी अधिक बधाई जो इस ब्रेकिंग न्यूज को ले कर आई हैं।

Raviratlami 29 जून 2009 को 8:39 pm

"...फुरसतिया जी अमरीका में रहने लगे, यह जानकारी आज अखबार से मिली. बड़े ही गुपचुप तरीके से अमरीका आ गये और हमें खबर भी न दी..हे राम!!..."

हे हे हे... अखबारी लेख अधिकतर ऐसे ही तो होते हैं? है कि नहीं?

रचना 29 जून 2009 को 8:40 pm

smaaer ne jo kehaa mae wahii kehnae aayee , yae kab hua aur kab gaye , kab aayae !!!!!

its not important who are mentioned or who are not but the facts are totally rubbish

महेन्द्र मिश्र 29 जून 2009 को 8:45 pm

अई हई ये फुरसतिया जी कब से फेक्टरी छोड़ अमेरिका में रहने लगे है तो गजब की बात ईई मीडिया वाले भी गजब की फेकत है .

मोहन वशिष्‍ठ 29 जून 2009 को 8:50 pm

sabhi ko bahut bahut mubarak ho

रंजन 29 जून 2009 को 8:56 pm

लेखक को हिन्दी चिट्ठों को लेकर और शोध करनी चाहिये थी.. कई तत्थ सही नहीं है..

पर प्रयास अच्छा है अपनी बिरादरी बढेगी.. एसे ही एक लेख ने मुझे ब्लोग की और ला दिया था..

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 जून 2009 को 8:57 pm

कचनजी ने लिखा जब फ़ुरसतिया जी कानपुर आते है तो दोस्तो के साथ महफ़िल जमा लेते है.
मेरे हीसाब से फ़ुरसतियाजी कि जगह समीरजी लिखना चाहीये था क्यो की मह्फ़िले तो सरकार ही जमा सकते है.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 जून 2009 को 9:01 pm

@2 सालो मे 25000 हजार हिन्दी ब्लोग नेट पर आगऐ।

भाईयो और बहिनो,
आप सभी फ़ुरसतिया के पिचे क्यो लगे हो ?
2 सालो मे 25000 हजार हिन्दी ब्लोग नेट पर आगऐ। इस नयाब जानकारी के बारे मे तो आपने खुशी जाहिर नही की.

Shastri 29 जून 2009 को 9:10 pm

हे प्रभु, क्या आपका नाम नहीं लिखा उन लोगों ने! कैसा गजब हो गया.

मुम्बई टाईगर के बिना तो हिन्दी चिट्ठाजगत में सब कुछ सूना सूना है.

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

ताऊ रामपुरिया 29 जून 2009 को 9:19 pm

भाई ये अखबारी माया है.. हमे तो सबसे बडा मलाल फ़ुरसतिया जी का है जो बिना हमे बताये अमेरिका चले गये. हमसे तो जब भी बात कार्ते हैं तब कहते हैं कि अभी फ़ेक्ट्री मे हूं अभी घर मे हूं..और अमेरिका जाऊंगा तो ताऊ तुमको साथ ले जाऊंगा...बहुत अफ़्सोस हुआ और ज्यादा अफ़्सोस तो इस बात का कि ये खबर हमें अखबार द्वारा मिल रही है.

आप तो ऐसे ना थे फ़ुरसतियाजी?

रामराम.

अविनाश वाचस्पति 29 जून 2009 को 9:30 pm

जिसे कच्‍चा बतला रहे हैं
वो तो पूरा पक्‍का है
तो कच्‍चा बतला रहा है
वो तो अभी बच्‍चा है
बच्‍चा है तो हुआ क्‍या
मन का तो सच्‍चा है
जो लेख लिखा है
लगा तो अच्‍छा है।

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 29 जून 2009 को 9:36 pm

॒ हे प्रभु, क्या आपका नाम नहीं लिखा उन लोगों ने! कैसा गजब हो गया.

मुम्बई टाईगर के बिना तो हिन्दी चिट्ठाजगत में सब कुछ सूना सूना है.
सस्नेह -- शास्त्री
............
गुरुदेव प्रकट भी हुऎ और बोले.भी.......
भक्त धन्य हुआ जी...........
गुरुदेव शास्त्रीजी, पहले से ही लाईन लगी पडी है अब हमारी किस्मत मे कहा चर्चाऎ.....

हिमांशु । Himanshu 29 जून 2009 को 9:38 pm

ताऊ की बात सच्ची है- सब अखबारी माया है । वैसे ब्लॉग-जगत अब अखबार की सुर्खी बन गया है तो सुखद ही है । आभार ।

कुश 29 जून 2009 को 9:50 pm

लो कल्लो बात फुरसतिया जी अमेरिका से आते है और कानपुर में मेल मिलाप करते है.. और हमें पता ही नहीं .. ये अखबार वाले भी पुरे सबूतों के साथ ही कुछ लिखते है..

cmpershad 29 जून 2009 को 10:18 pm

तभी तो लोग ब्लाग को साहित्य मानने से इन्कार कर रहे हैं - अरे, एक गप्प को भी नहीं पचा सके!!!:)

Mired Mirage 29 जून 2009 को 10:50 pm

बढिया खबर है और फ़ुरसतिया जी को बधाई।
घुघूती बासूती

eSwami 30 जून 2009 को 12:15 am

वाह वाऽऽ! सब्बास!!
बहुत सटीक और सामयिक लेखन है.
मैने इतना निष्पक्ष और ज्ञानवर्धक लेख आज तक प्रिंट मीडिया में नहीं पढा. साधूवाद.

अनूप शुक्ल 30 जून 2009 को 12:41 am

ई कौन से फ़ुरसतिया जी हैं भाई जो अमेरिका चले गये और बताइन भी नहीं!

नवभारत टाइम्स के ये हाल हो गये! अखबारों की हालत अब ब्लाग से बेहतर तो नहिऐं लगती है! :)

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 30 जून 2009 को 1:24 am

आदरणीय हिन्दी के कच्चे चिट्ठेवालो,
#फुरसतियाजी' को लेकर आप कोनो ही बात का टेसनवा ना ले , अखबारवालीबाई तो बराक औबामा को फुरसतिया पुकारत है। जो कानपुर की अन्धेरी रातो मे सूनसान राहो मे महफ़िल जमावत है, उन्हे लोग अमेरिकि फुरसतियाजी कहवत है।

अल्पना वर्मा 30 जून 2009 को 1:31 am

नवभारत की यह खबर है की सनसनी--??

१-२ साल में २५हज़ार हिंदी ब्लॉगर!
२-फुरसतिया जी अमेरिका मेंब्लॉग्गिंग करते हैं !
३-भडास के चलाने वालों की आमदनी एक लाख प्रति माह सिर्फ इस एक ब्लॉग से!
---
मुम्बई tiger जी धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 30 जून 2009 को 7:19 am

मुम्बई टाईगर जी।
बधाई हो।
कचन श्रीवास्तव का आलेख अपूर्ण लगा।
अब कौन इस चर्चा में दिमाग खपाए।
इतनी देर में तो 4 पोस्ट लिखी जायेगी।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` 30 जून 2009 को 8:09 am

हमारे हिन्दी ब्लोग जगत के सभी साथियोँ को
बहुत बहुत बधाई
और आपका आभार
इस समाचार को,
हम सब तक पहुँचाने के लिये
- लावण्या

संजय बेंगाणी 30 जून 2009 को 9:49 am

पिछले चार सालों से यहाँ भाड़ झोंक कर भी जो नहीं जान पाए वह कंचन जी ने महा रिसर्च कर बता दिया! कमाल है यह लेख. फुरसतिया अमेरीका से बतियाने कानपुर आ गए. हमें पता ही नहीं चला.

हिन्दी ब्लॉगिंग की यही उपलब्धी रही.... मोहल्ला, कस्बा....

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" 30 जून 2009 को 2:28 pm

बेचारे अखबार वालों नें इस लेख को तैयार करने में कितना परिश्रम किया होगा.......उसके लिए वो कम से कम साधुवाद के पात्र तो होने ही चाहिए!!!!!

Shiv Kumar Mishra 30 जून 2009 को 3:55 pm

कंचन जी की जानकारी सही नहीं है. पिछले एक महीने से ही फुरसतिया जी अमेरिका छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में रहने लगे हैं. हिंदी चिट्ठाकारों की संख्या को लेकर भी उनकी जानकारी ठीक नहीं लग रही है. एक लाख की कमाई (अगर यह जानकारी सही है तो) करने वाले चिट्ठे को बधाई.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 30 जून 2009 को 9:15 pm

Shiv Kumarji Mishra

जहा तक मेने महसुस किया उपरोक्त आलेख कचऩजी ने किसी विशेष ब्लोगर के हवाले से उपल्ब्ध जानकारीयो पर छापा होगा। जो पत्रकारिता के लिऐ व्यवाहरिक नही है क्यो कि गलत जानकारी राष्ट्र, समाज, परिवार, एवम व्य्क्ती को नुकसान पहुचा सकती है। मेरे पत्रकार दोस्तो को इस घटना के बाद कुछ सीख लेने मे शर्म महसुस नही होनी चाहिऐ।